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AI and Deepfake Rules: दिल्ली हाईकोर्ट ने एआई और डीपफेक संबंधी नियम बनाने की मांग पर जवाब देने के लिए केंद्र को दो हफ्ते का समय दिया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक प्रौद्योगिकियों के लिए नियमों के अभाव के संबंध में एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर जवाब देने के लिए सोमवार को केंद्र को दो सप्ताह का समय दिया.

AI and Deepfake Rules: दिल्ली हाईकोर्ट ने एआई और डीपफेक संबंधी नियम बनाने की मांग पर जवाब देने के लिए केंद्र को दो हफ्ते का समय दिया
AI and Deepfake

नई दिल्ली, 9 जनवरी : दिल्ली उच्च न्यायालय ने देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक प्रौद्योगिकियों के लिए नियमों के अभाव के संबंध में एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर जवाब देने के लिए सोमवार को केंद्र को दो सप्ताह का समय दिया. अधिवक्ता चैतन्य रोहिल्ला द्वारा अधिवक्ता मनोहर लाल के माध्यम से दायर जनहित याचिका में केंद्र को डीपफेक और एआई तक पहुंच प्रदान करने वाली वेबसाइटों की पहचान करने और उन्हें ब्लॉक करने के साथ-साथ उनके विनियमन के लिए दिशानिर्देश तय करने का निर्देश देने की मांग की गई है.

अदालत ने मामले के बड़े आयाम पर जोर दिया और कहा कि जनहित याचिका के जवाब में नियम बनाने के लिए भारत संघ सबसे उपयुक्त होगा. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पी.एस. अरोड़ा की पीठ ने कहा, "इस मामले का एक बड़ा आयाम है, इसलिए हमने सोचा कि नियम बनाने के लिए भारत संघ सबसे अच्छा होगा. यूओआई को पहले अपना दिमाग लगाने दें." पीठ ने मामले को 19 फरवरी को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया. यह भी पढ़ें : Social Media Danger For Youths: युवाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा! सोशल मीडिया पर औसतन 7 घंटे रोज बिता रहे भारतीय युवा- रिसर्च

पिछले साल दिसंबर में हाईकोर्ट ने इसी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से रुख मांगा था. जनहित याचिका में अदालत से एआई का निष्पक्ष कार्यान्वयन सुनिश्चित करने और संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकारों के अनुसार एआई और डीपफेक तक पहुंच के लिए दिशानिर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान एआई और डीपफेक मुद्दों की जटिलता को स्वीकार करते हुए कहा था कि ये संबोधित करने के लिए चुनौतीपूर्ण क्षेत्र हैं, और प्रौद्योगिकी के महत्व को समझने और इसके लाभों को पहचानने के महत्व पर जोर दिया था.

केंद्र के वकील ने कहा था कि जनहित याचिका में उठाए गए मामले कानून बनाने के दायरे में आते हैं और सरकार पहले से ही उन पर ध्यान दे रही है. हालांकि, अदालत ने कहा था कि मुद्दों का समाधान खोजने के लिए व्यापक विचार-विमर्श सहित परस्पर विरोधी हितों को संतुलित करने की जरूरत है. जनहित याचिका पर, जो एआई को परिभाषित करने, एआई सिस्टम से जुड़े जोखिम, डीपफेक की भ्रामक प्रकृति और व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा के साथ एआई के अंतर्संबंध सहित विभिन्न चिंताओं को संबोधित कर रही है, पीठ ने केंद्र के वकील को निर्देश इकट्ठा करने के लिए समय दिया था.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 09, 2024 08:58 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).