उत्तरकाशी की त्रासदी नई चेतावनी; क्यों लगातार आपदाओं की चपेट में है उत्तराखंड?

तेज बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ ने धराली गांव और आसपास के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे 20-25 होटल और होमस्टे बह जाने की आशंका है. 100 से अधिक लोग लापता हैं और राहत-बचाव कार्य तेजी से जारी है.

Uttarkashi Cloudburst | X

देहरादून: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में आई प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर राज्य की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया. मंगलवार को करीब 1:45 बजे खीर गंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बादल फटने की घटना ने देखते ही देखते भयावह तबाही मचा दी. तेज बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ ने धराली गांव और आसपास के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे 20-25 होटल और होमस्टे बह जाने की आशंका है. 100 से अधिक लोग लापता हैं और राहत-बचाव कार्य तेजी से जारी है.

क्या होता है 'बादल फटना'?

‘बादल फटना’ एक चरम मौसमी घटना होती है जिसमें बहुत कम समय में 100 मिमी से ज़्यादा बारिश हो जाती है. खासकर पहाड़ी इलाकों में इसका असर ज्यादा होता है क्योंकि वहां पानी के बहाव के रास्ते सीमित होते हैं. इस वजह से अचानक बाढ़, भूस्खलन और भारी जान-माल का नुकसान देखने को मिलता है.

उत्तराखंड: आपदाओं की जद में क्यों?

उत्तराखंड का भौगोलिक स्थान और बनावट इसे आपदा-प्रवण बनाता है. यह क्षेत्र हिमालय की गोद में स्थित है जो एक युवा पर्वत श्रंखला है और लगातार भूगर्भीय हलचलों (Tectonic Activity) का शिकार रहता है. यही कारण है कि यहां भूकंप, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं बार-बार होती हैं.

कुछ प्रमुख कारण:

इंसानी गतिविधियां और विकास का दुष्परिणाम

उत्तराखंड की प्राकृतिक अस्थिरता के साथ-साथ मानवीय गतिविधियां भी आपदाओं को बढ़ा रही हैं. पर्यटन और तीर्थयात्रा ने राज्य में बेतहाशा निर्माण को जन्म दिया है.

आपदाओं का लंबा इतिहास

उत्तराखंड में आपदाएं कोई नई बात नहीं हैं. कुछ बड़ी घटनाएं जो आज भी लोगों की यादों में हैं:

क्या कहता है हालिया आंकड़ा?

क्या है समाधान की जरूरत?

अब समय आ गया है कि हम चेत जाएं और केवल आपदा के बाद राहत नहीं, बल्कि आपदा से पहले सुरक्षा पर ध्यान दें.

क्या किया जाना चाहिए?

चेतावनी हर बार क्यों?

हर साल जब उत्तराखंड में आपदा आती है, तो सरकार और जनता कुछ दिन सजग रहती है, लेकिन फिर वही लापरवाही शुरू हो जाती है. उत्तरकाशी की घटना एक और चेतावनी है. इस बार हमें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर हमने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो आने वाला कल और भी भयावह हो सकता है.

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