Vikram Bhatt Fraud Case: 30 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को सुप्रीम कोर्ट से राहत; मिला अंतरिम जमानत का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ₹30 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले में फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम जमानत दे दी है. कोर्ट ने इस दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आपराधिक मुकदमों का इस्तेमाल पैसा वसूली के लिए नहीं किया जाना चाहिए.

विक्रम भट्ट, श्वेतांबरी भट्ट (Photo Credit: Instagram)

Vikram Bhatt Fraud Case:  सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को मशहूर फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट (Vikram Bhatt) और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट (Shwetambari Bhatt) को एक बड़ी कानूनी राहत दी है. अदालत ने ₹30 करोड़ के कथित धोखाधड़ी मामले में दोनों को अंतरिम जमानत (Interim Bail) प्रदान की है. यह आदेश राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर आया है, जिसमें भट्ट दंपति को राहत देने से इनकार कर दिया गया था. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने उदयपुर जेल में बंद विक्रम और श्वेतांबरी को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने उन्हें संबंधित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अनुसार जमानत बॉन्ड भरने का आदेश दिया है. यह भी पढ़ें: Vikram Bhatt Arrested: फिल्ममेकर विक्रम भट्ट गिरफ्तार, राजस्थान के डॉक्टर से 30 करोड़ की ठगी का आरोप

कोर्ट की तीखी टिप्पणी: 'जेल वसूली का जरिया नहीं'

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर गंभीर रुख अपनाया। पीठ ने सवाल किया कि क्या आपराधिक न्याय प्रणाली का इस्तेमाल वित्तीय विवादों को सुलझाने या कर्ज वसूली के लिए किया जा रहा है? न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा:

‘आप पैसा वसूलने के लिए इन आपराधिक मामलों का इस्तेमाल नहीं कर सकते.’

अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है और इस मामले में शिकायतकर्ता, डॉ. अजय मुर्डिया (इंदिरा आईवीएफ के संस्थापक) को भी पक्षकार बनाया है ताकि उनका जवाब सुना जा सके.

क्या हैं आरोप?

यह पूरा मामला डॉ. अजय मुर्डिया की शिकायत पर आधारित है. मुर्डिया का आरोप है कि उन्होंने फिल्म निर्माण के सौदे के तहत विक्रम भट्ट और उनकी टीम में लगभग ₹30 करोड़ का निवेश किया था. शिकायत के अनुसार, यह निवेश मुर्डिया की दिवंगत पत्नी की बायोपिक और अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए था.

बचाव पक्ष की दलीलें

भट्ट दंपति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पैरवी की. उन्होंने तर्क दिया कि यह विवाद पूरी तरह से दीवानी (Civil) प्रकृति का है. रोहतगी ने कहा कि यह मामला एक फिल्म प्रोजेक्ट से जुड़ा है जो व्यावसायिक रूप से सफल नहीं हो पाया. उन्होंने दलील दी- ‘दोनों फिल्में फ्लॉप हो गईं. यह निर्देशक की गलती नहीं है. इसके लिए आप किसी निर्देशक और उसकी पत्नी को जेल में नहीं डाल सकते.’ यह भी पढ़ें: Director Vikram Bhatt Arrested: 30 करोड़ रूपए के फ्रॉड केस में मशहूर डायरेक्टर विक्रम भट्ट हुए गिरफ्तार, उदयपुर में फिर्यादी ने दर्ज करवाई थी FIR

कानूनी घटनाक्रम और अगला कदम

विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट 7 दिसंबर 2025 से जेल में थे. इससे पहले 31 जनवरी 2026 को राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दे दी है, लेकिन मामला अभी भी विचाराधीन है. कोर्ट अब इस मामले पर 19 फरवरी 2026 को अगली सुनवाई करेगा, जिसमें राजस्थान सरकार के जवाब और स्थाई जमानत की शर्तों पर विचार किया जाएगा.

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