'गोपी गवैया बाघा बजैया' रिव्यू: शांति का संदेश देती है ये मजेदार फिल्म

फिल्म 'गोपी गवैया बाघा बजैया' (Goopi Gawaiya Bagha Bajaiya ) सत्यजीत रे के दादा उपेन्द्रकिशोर राय चौधरी द्वारा लिखी गई एक कहानी पर आधारित है. इस फिल्म का प्रीमियर सबसे पहले साल 2013 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था

फिल्म 'गोपी गवैया बाघा बजैया' का रिव्यू

फिल्म 'गोपी गवैया बाघा बजैया' (Goopi Gawaiya Bagha Bajaiya ) सत्यजीत रे के दादा उपेन्द्रकिशोर राय चौधरी द्वारा लिखी गई एक कहानी पर आधारित है. इस फिल्म का प्रीमियर सबसे पहले साल 2013 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था और 6 साल बाद अब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. यह एक ऐसी एनीमेशन फिल्म है जो बच्चों के साथ-साथ बड़ों का भी उतना ही मनोरंजन करेगी.साथ ही यह फिल्म शांति का संदेश भी देती है, जो इस वक्त शायद देश के लिए काफी महत्वपूर्ण है.

फिल्म दो बहुत ही बुरे संगीतकार गोपी और बाघा की कहानी है. गोपी को गाना गाने का शौक है और बाघा ढोलक बजाता है. गोपी की बेसुरी आवाज से तंग आकर उसके गांव वाले उसे गांव से बाहर का रास्ता दिखा देते हैं. फिर उसकी मुलाकात बाघा से होती है. इसके बाद भूतों के राजा उन्हें 4 वरदान देते हैं, जो उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं. इन शक्तियों का इस्तेमाल कर वह किस तरह हुंडी और शुंडी राज्यों के बीच होने जा रहे युद्ध को रोकते हैं, इसके लिए आपका इस फिल्म को देखना जरुरी है.

शिल्पा रानाडे (Shilpa Ranade) ने इस फिल्म का निर्देशन किया है और उन्हें डायरेक्शन के लिए फुल मार्क्स मिलते हैं. 'गोपी गवैया बाघा बजैया' कही भी बोरिंग नहीं लगती है बल्कि यह फिल्म आपको आपका बचपन याद दिला देगी. हालांकि, आज के समय के हिसाब से यह फिल्म कुछ दर्शकों को थोड़ी पुरानी लग सकती है. मगर तब भी हम आपको यही सलाह देना चाहेंगे कि अगर आप सामान्य सिनेमा से ब्रेक लेकर कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको जरुर देखनी चाहिए. बच्चों के साथ-साथ बड़े भी 'गोपी गवैया बाघा बजैया' को खूब एन्जॉय करेंगे. हम इस फिल्म को 3 स्टार्स देना चाहेंगे.

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