देश की खबरें | युवा वकीलों को गरीब वादियों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए: उच्चतम न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि युवा अधिवक्ताओं को उन वादियों की मदद के लिए आगे आना चाहिए जो साधनों या जागरूकता की कमी के कारण वकील की सेवाएं नहीं ले सकते।
नयी दिल्ली, 16 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि युवा अधिवक्ताओं को उन वादियों की मदद के लिए आगे आना चाहिए जो साधनों या जागरूकता की कमी के कारण वकील की सेवाएं नहीं ले सकते।
व्यक्तिगत रूप से एक पक्ष को कानूनी सहायता प्रदान करने वाले युवा वकील की सराहना करते हुए न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि वकीलों को अपनी पेशेवर सेवाओं के बदले में किसी भी तरह की अपेक्षा किए बिना वादी को सर्वोत्तम कानूनी सहायता प्रदान करनी चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘बार में शामिल होने वाले युवा वकीलों को जब भी अवसर मिले, उन वादियों की सहायता के लिए स्वेच्छा से आगे आना चाहिए जो साधनों या जागरूकता की कमी के कारण वकील की सेवाएं नहीं ले सकते। इसके अलावा, उन्हें अपनी पेशेवर सेवाओं के बदले में किसी भी तरह की अपेक्षा किए बिना वादियों को सर्वोत्तम कानूनी सहायता प्रदान करनी चाहिए।’’
पीठ ने कहा, ‘‘गरीब वादियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए स्वेच्छा से आगे आने के इन प्रयासों से वकील सामूहिक रूप से समाज को यह संदेश दे सकते हैं कि कानूनी पेशा न्याय तक पहुंच और कानून के समक्ष समानता के अधिकार के लिए खड़ा है, न केवल सिद्धांत रूप में बल्कि व्यवहार में भी।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत क्षमता में भी मुकदमे को सौहार्दपूर्ण ढंग से समाप्त करने के साझा उद्देश्य की दिशा में काम करते हुए, वकीलों के ऐसे प्रयास यह संदेश देंगे कि वकील, विशेष रूप से श्रम और वैवाहिक मामलों में, पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता करने की प्रक्रिया में बाधा नहीं बन रहे हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘वे पक्षों को उनके विवादों को समाप्त करने में मदद करने में भी प्रभावी रूप से अपनी भूमिका निभा सकते हैं, तथा मध्यस्थता और सुलह जैसे वैकल्पिक विवाद तंत्रों में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं।’’
मामले का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि वकील संचार आनंद दो वर्षों में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए इस अदालत के समक्ष 14 बार उपस्थित हुए। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता, सीमित साधनों वाला व्यक्ति होने के कारण, वकील की सेवाओं के लिए उन्हें एक पैसा भी नहीं दे पाया।
पीठ ने कहा, ‘‘वकील उच्चतम न्यायालय विधिक सेवा समिति के पैनल में भी शामिल नहीं है, ताकि उसे अपने समय और खर्च के लिए कुछ उचित पारिश्रमिक मिल सके। फिर भी, वकील इन दो वर्षों के दौरान न केवल याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए, बल्कि इस मामले में न्यायोचित और उचित निष्कर्ष पर पहुंचने में इस अदालत की सहायता करने के लिए भी समर्पित रूप से इस अदालत के समक्ष उपस्थित हुआ।’’
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि देश की शीर्ष अदालत में न्याय तक पहुंच वित्तीय संसाधनों की कमी की बेड़ियों से बंधी नहीं है।
पीठ ने कहा कि सभी वर्गों के लोग, जो अपनी शिकायत लेकर इस अदालत में आना चाहते हैं, उन्हें बार के जिम्मेदार सदस्यों द्वारा आवश्यक सहायता प्रदान की जानी चाहिए, जिससे पक्षकार के लिए मुकदमेबाजी की लागत में वृद्धि न हो या प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
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