नयी दिल्ली, 11 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने 38 नालों के पानी को शोधित करने के लिए कदम उठाने में विफल रहने पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश जल निगम को फटकार लगाई। नालों के पानी के शोधित न होने के चलते अशोधित जलमल सीधे यमुना में बह रहा है।
अपने आदेश का अनुपालन न होने से नाराज न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने निकाय के प्रबंध निदेशक को वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पेश होने और चूक का कारण बताने का निर्देश दिया।
पीठ ने मामले की अगली सुनवायी की तिथि 18 मार्च करना निर्धारित करते हुए कहा, ‘‘हमने पाया कि 25 नवंबर, 2024 के आदेश का कोई अनुपालन नहीं हुआ है। हम उत्तर प्रदेश जल निगम के प्रबंध निदेशक को सुनवाई की अगली तारीख से एक सप्ताह पहले व्यक्तिगत रूप से अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं।’’
उप्र जल निगम के वकील ने कहा कि 38 नालों और आंशिक शोधन वाले पांच नालों के पानी को शोधित करने के अंतरिम उपाय आगरा नगर निकाय द्वारा किए जाने थे।
शीर्ष अदालत ने पूर्व में जल निगम को नालों के पानी को शोधित करने के लिए अंतरिम उपाय करने का निर्देश दिया था और सभी संबंधित अधिकारियों से कहा था कि काम करने के लिए जिनकी मंजूरी की आवश्यकता हो, वे तुरंत मंजूरी जारी करें।
नदी के तल से गाद, कीचड़ और कचरा हटाने के संबंध में अदालत ने आईआईटी रुड़की की इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया कि 5 से 6 मीटर तक गाद हटाना व्यवहार्य नहीं है।
अदालत ने उप्र सरकार और जल निगम को एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था जिसमें यह सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित उपायों के बारे में बताया जाना था कि नदी तल पर कचरा न फेंका जाए।
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