विदेश की खबरें | विश्व खाद्य कार्यक्रम को मिला शांति का नोबेल पुरस्कार

विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूईपी) ने पिछले साल दुनिया के 88 देशों के करीब 10 करोड़ लोगों को सहायता उपलब्ध कराई।

डब्ल्यूईपी के प्रमुख डेविड ब्यासले ने नाइजर से एसोसिएट प्रेस से बात करते हुए कहा, ‘‘ मैं मानता हूं कि मेरे जीवन में पहली बार है जब मैं निशब्द हूं।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत ही स्तब्ध करने वाला और चकित करने वाला है।’’

ब्यासले ने बताया कि नोबेले पुरस्कार मिलने की जानकारी उन्हें डब्ल्यूईपी के मीडिया अधिकारी से मिली।

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नोबेल समिति ने कहा कि कोरोना वायरस की महामारी के चलते दुनियाभर में भूखे लोगों की संख्या में लाखों का इजाफा हुआ है। समिति ने सरकारों से आह्वान किया कि वे विश्व खाद्य कार्यक्रम और अन्य सहायता संगठनों को वित्तीय मदद सुनिश्चित करें ताकि वे उन्हें भोजन मुहैया करा सकें।

ओस्लो में नोबेल समिति की अध्यक्ष बेरिट रेइस एंडरसन ने नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा, ‘‘इस साल के सम्मान के साथ हमारी (समिति) इच्छा दुनिया का ध्यान उन लाखों लोगों की ओर आकर्षित कराने की है जो भूख की पीड़ा सह रहे हैं या उनके समक्ष इसका खतरा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विश्व खाद्य कार्यक्रम ने खाद्य सुरक्षा को शांति की कुंजी बनाने के लिए बहुस्तरीय सहयोग में अहम भूमिका निभाई है।’’

बेरिट ने कहा, ‘‘ विश्व खाद्य कार्यक्रम राष्ट्रों में भाईचारा बढ़ाने के लिए रोजाना कार्य कर रहा है जिस (लक्ष्य) का उल्लेख अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में किया है।’’

गौरतलब है कि इस साल भी शांति नोबेल पुरस्कार के कई दावेदार थे। एक फरवरी को नामांकन की अंतिम तारीख तक 211 हस्तियों और 107 संगठनों को नामांकित किया गया था।

हालांकि, नार्वे की नोबेल समिति ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार के विजेता को लेकर पूर्ण गोपनीयता बरती। पुरस्कार के तौर पर विजेता को 10 दिसंबर को ओस्लो में आयोजित समारोह में एक करोड़ क्रोन (करीब आठ करोड़ रुपये) नकद और स्वर्ण पदक दिया जाएगा। यह पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर दिया जाता है। हालांकि, कोविड-19 महामारी की वजह से इस बार छोटे स्तर पर समारोह का आयोजन किया जाएगा।

गौरतलब है कि अगले हफ्ते अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की जाएगी।

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