विश्वकप-1996: अप्रवासी संगठनों को भुगतान से पहले, पिलकॉम को स्रोत पर कर काटना था : न्यायालय
तीन देशों में संयुक्त रूप से क्रिकेट विश्व कप टूर्नामेन्ट 1996 के आयोजन के लिये पाकिस्तान, भारत और श्रीलंका के क्रिकेट बोर्ड या एसोसिएशन ने पिलकॉम का गठन किया था।
नयी दिल्ली, 29 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि 1996 में आयोजित क्रिकेट विश्व कप के लिये गठित पाक-इंडो-लंका संयुक्त प्रबंधन कमेटी (पिलकॉम) को इस टूर्नामेन्ट से संबद्ध अप्रवासी खेल संगठनों को भुगतान करते समय स्रोत पर ही कर काट लेना चाहिए था।
तीन देशों में संयुक्त रूप से क्रिकेट विश्व कप टूर्नामेन्ट 1996 के आयोजन के लिये पाकिस्तान, भारत और श्रीलंका के क्रिकेट बोर्ड या एसोसिएशन ने पिलकॉम का गठन किया था।
न्यायमूर्ति उदय यू ललित और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के नवंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ पिलकॉम की अपील पर अपने निर्णय में कहा कि क्रिकेट विश्व कप टूर्नामेन्ट के लिये अप्रवासी खेल संगठनों को किया गया भुगतान उनकी आमदनी को परिलक्षित करता है जो भारत में अर्जित की गयी थी।
पीठ ने कहा कि पेश मामले में अप्रवासी खेल संगठनों को किया गया भुगतान उनकी आमदनी दर्शाता है जो भारत में हुयी मानी जायेगी। परिणामस्वरूप पिलकॉम को आयकर कानून की धारा 194ई के अनुसार, स्रोत पर ही कर काट लेना चाहिए था।
यह धारा अप्रवासी खिलाड़ियों या खेल संगठनों को किये गये भुगतान से संबंधित है।
फैसले में इस बात का जिक्र किया गया कि इस विश्व कप टूर्नामेन्ट में 37 में से 17 मैच भारत में खेले गये थे।
इस मामले के तथ्यों का जिक्र करते हुये फैसले में कहा गया कि तीनों मेजबान देशों को टूर्नामेन्ट के प्रारंभिक चरण के मैचों और अपने अपने देशों में खेल के प्रचार के सिलसिले में विभिन्न देशों के क्रिकेट बोर्ड या एसोसिएशनों को अलग अलग राशि का भुगतान करना था।
इसके लिये पिलकॉम ने लंदन मे दो बैंक खाते खोले थे जिनका संचालन भारत और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रतिनिधियों को संयुक्त रूप से करना था। इन खातों में प्रायोजकों, टीवी के अधिकारों और दूसरी मदों से प्राप्त धनराशि जमा की जानी थी जिससे सारे खर्च होने थे।
आयकर विभाग को यह जानकारी मिली कि पिलकॉम ने आइसीसी और इसके सदस्य देशों के क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड या एसोसिएशनों को लंदन के बैक खातों से भुगतान किया था। इसके बाद ही आयकर विभाग ने कोलकाता स्थित पिलकॉम के कार्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि आयकर कानून के प्रावधान के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाये।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 29, 2020 07:33 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

