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कोविड-19 रोकथाम दिशानिर्देशों में महिलाओं के आश्रयगृह भी शामिल किये जायें: न्यायालय

न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकारें वस्तुस्थिति का आकलन करने के बाद महिलाओं के आश्रय गृहों में कोरोनावायरस का प्रसार रोकने के लिये उचित कदम उठायें

कोविड-19 रोकथाम दिशानिर्देशों में महिलाओं के आश्रयगृह भी शामिल किये जायें: न्यायालय
जमात

नयी दिल्ली, 21 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकने के लिये बनाये गये अपने दिशानिर्देशों का दायरा मंगलवार बढ़ाते हुये इसमें बाल सुधार गृहों से लेकर नारी निकेतनों और उनके आश्रय गृहों को भी शामिल कर दिया। न्यायालय ने सरकार से कहा कि वह इन आश्रय गृहों में ज्यादा भीड़ होने की स्थिति में कुछ लोागों को रिहा करने की संभावना पर गौर करे।

न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकारें वस्तुस्थिति का आकलन करने के बाद महिलाओं के आश्रय गृहों में कोरोनावायरस का प्रसार रोकने के लिये उचित कदम उठायें

शीर्ष अदालत ने तीन अप्रैल को कोरोनावायरस महामारी के मद्देनजर बाल सुधार गृहों की स्थिति और इस संक्रमण से निबटने की तैयारियों के मुद्दे का स्वत: ही संज्ञान लिया था। इसके बाद न्यायालय ने राज्य सरकारों और संबंधित प्राधिकारियों को कई निर्देश दिये थे।

याचिकाकर्ता रिशाद मुर्तजा के अधिवक्ता शोएब आलम ने सुनवाई के दौरान कहा कि महामारी की स्थिति को देखते हुये वह नारी निकेतनों और महिलाओं के आश्रय गृहों पर भी तीन अप्रैल के दिशा निर्देश लागू करने का अनुरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन आश्रय गृहों में अनेक वयस्क महिलायें स्वेच्छा से रह रहीं हैं। इन महिलाओं को आश्रय गृहों से रिहा किया जाना चाहिए ताकि इनमें ज्यादा भीड़ नहीं हो।

केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि जेलों से रिहा किये गये कैदियों को भी लॉकडाउन के नियमों की वजह से घर जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

पीठ ने कहा कि वह याचिका में इस मुद्दे पर व्यक्त की गयी चिंता के मद्देनजर सरकार को इस मामले पर गौर करने का निर्देश दे रही है और जहां भी संभव हो, वस्तुस्थिति का आकलन करने के बाद महिलाओं को रिहा किया जाना चाहिए।

इस याचिका में कहा गया है कि नारी निकेतनों की स्थिति बहत ही दयनीय है और इस वजह से वहां रहने वाली महिलाओं को इस महामारी के संक्रमण का खतरा अधिक है।

याचिका में कहा गया है कि नारी निकेतनों में भीड़ होने की वजह से इनमे रहने वाली महिलाओं के बीच उचित दूरी बनाकर रहना बहुत ही मुश्किल है।

अनूप

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 21, 2020 06:37 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).