नयी दिल्ली, 21 दिसंबर राज्यसभा में बृहस्पतिवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया किंतु राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सहित कुछ पार्टियों के सदस्यों ने इसके लागू होने को लेकर संदेह जताया और सरकार से इसे जल्द लागू करने की मांग की।
लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के प्रावधान वाले ‘संविधान (एक सौ अट्ठाईसवां संशोधन) विधेयक, 2023’ पर उच्च सदन में हुई चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वंदना चव्हाण ने कहा कि उनकी पार्टी विधेयक का समर्थन करती है किंतु इसके लागू होने के बारे में उसे गंभीर संदेह हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या उसने नोटबंदी, लॉकडाउन आदि का निर्णय तुरंत नहीं लिया था।
उन्होंने प्रश्न किया कि देश को महिला आरक्षण के लिए जनगणना और परिसीमन की प्रतीक्षा क्यों करनी पड़ेगी? उन्होंने यह भी प्रश्न किया कि राज्यसभा और राज्य विधान परिषदों में महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा है?
निर्दलीय कपिल सिब्बल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि उन्हें इस विधेयक के भविष्य को लेकर संदेह है। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया में बहुत अधिक समय लग जाता है, यह बात पुरानी परिसीमन प्रक्रिया को देखते हुए समझी जा सकती है।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के अब्दुल्ला वहाब ने कहा कि वह इस विधेयक से आंशिक रूप से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जाति प्रथा एक सच्चाई है।
उन्होंने कहा कि सरकार को मुस्लिमों को केवल अल्पसंख्यक के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन तलाक समाप्त किए जाने के बाद कई मुस्लिम महिलाओं ने भाजपा सरकार को समर्थन दिया था।
बीजू जनता दल के मुजीबुल्ला खान ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि नारी को सशक्त बनाने से ही समाज सशक्त बनेगा।
भाजपा की इंदुबाला गोस्वामी ने कहा कि देश की आजादी के 75 वर्ष बाद भी लोकसभा में महिलाओं का मात्र 14 प्रतिशत और राज्यसभा में 12 प्रतिशत ही प्रतिनिधित्व है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने शासनकाल के नौ वर्ष में देश को नारी शक्ति की ताकत से परिचय करवाया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का मकसद केवल महिला आरक्षण देना नहीं बल्कि महिलाओं को नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान देना भी ध्येय है। गोस्वामी ने कहा कि जो विपक्षी नेता सरकार से यह सवाल कर रहे हैं कि महिला आरक्षण का विधेयक नौ साल में क्यों नहीं लाया गया तो उन्हें बताना चाहिए पिछले साठ साल में महिलाओं को केवल वोट की राजनीति तक सीमित रखने का काम किसने किया?
निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि यह ऐसा विधेयक है जिसकी देश अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाये गये अभियान ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओं’ के कारण हरियाणा में स्त्री-पुरुष अनुपात में वृद्धि हुई है।
भाजपा की कांता कर्दम ने चर्चा में भाग लेते हुए राजस्थान में महिलाओं के साथ अत्याचार की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश के गैर भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं को समुचित सम्मान और सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
कर्दम ने कहा कि ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देने वाली कांग्रेस नेता ने राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की।
सामाजिक कल्याण राज्य मंत्री एवं आरपीआई (ए) नेता रामदास आठवले ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा, ‘‘महिलाओं की गाड़ी अब कहीं नहीं रुकेगी, महिला अब किसी के आगे नहीं झुकेगी।’’ आठवले ने कहा कि उन्होंने महिलाओं के हितों को लेकर कई साल संघर्ष किया है।
भाजपा की रामिलाबेन बेचारभाई बारा ने महिला आरक्षण विधेयक लाये के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए अपनी बात को गुजराती में रखा। उन्होंने इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने का सदस्यों से अनुरोध किया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)











QuickLY