बढ़ रही हैं जापान में साके बनाने वाली महिलाएं

जापान की मशहूर शराब साके बनाने में कभी महिलाओं की भागीदारी की इजाजत नहीं थी.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जापान की मशहूर शराब साके बनाने में कभी महिलाओं की भागीदारी की इजाजत नहीं थी. लेकिन अब बड़ी संख्या में महिलाएं इस काम से जुड़ रही हैं.सूरज उगने के थोड़ी देर बाद, जापानी साके बनाने वाली मिए ताकाहाशी अपने परिवार की 150 साल पुरानी साके ब्रुअरी, "कोटेन," में मिश्रण का तापमान जांचती हैं. यह ब्रुअरी जापानी आल्प्स की पहाड़ियों के पास स्थित है.

वह लकड़ी के एक ऊबड़-खाबड़ तख्ते पर खड़ी होकर, 3,000 लीटर से ज्यादा क्षमता वाले बड़े टैंक में उबलते हुए चावल, पानी और चावल की फफूंद के मिश्रण को लंबी छड़ी से चलाती हैं. चावल की फफूंद को कोजी कहा जाता है. 43 साल की मिए कहती हैं, "सुबह का समय साके बनाने के लिए सबसे अहम होता है." उनकी ब्रुअरी नागानो प्रांत में है, जो साके बनाने के लिए मशहूर है.

बहुत कम महिलाएं

मिए ताकाहाशी जापान की गिनी-चुनी महिला तोजी (साके बनाने वाली मास्टर) में से एक हैं. जापान की "तोजी गिल्ड एसोसिएशन" में 1,000 से ज्यादा ब्रुअरी हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 33 महिला तोजी हैं. हालांकि यह संख्या पहले से ज्यादा है, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद तक महिलाओं को साके बनाने में शामिल नहीं किया जाता था.

साके बनाने का इतिहास 1,000 साल से भी पुराना है और यह जापान के पारंपरिक शिंटो धर्म से गहराई से जुड़ा है. 1603 से 1868 के बीच के एडो काल में जब साके का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हुआ, तब महिलाओं के ब्रुअरी में जाने पर पाबंदी लग गई.

इस पाबंदी का कारण साफ नहीं है. नीगाता यूनिवर्सिटी के "साकेओलॉजी सेंटर" के वाइस डायरेक्टर यासुयुकी किशी के मुताबिक, एक सिद्धांत यह है कि मासिक धर्म की वजह से महिलाओं को अशुद्ध माना गया और उन्हें पवित्र जगहों से दूर रखा गया.

दूसरा सिद्धांत यह कहता है कि साके उत्पादन में भारी और खतरनाक काम शामिल थे, इसलिए इसे महिलाओं के लिए अनुपयुक्त माना गया. लेकिन समय के साथ लैंगिक बाधाएं टूटीं और जापान की बूढ़ी होती आबादीके कारण काम करने वालों की घटती संख्या ने महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में जगह बनाई.

मिए कहती हैं, "यह अभी भी पुरुष प्रधान उद्योग है लेकिन अब लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि व्यक्ति में काम के लिए जोश है या नहीं, लिंग की परवाह किए बिना."

आ रहा है बदलाव

जापान में महिलाओं को लेकर सोच काफी रूढ़िवादी रही है और उनके साथ भेदभाव एक बड़ा मुद्दा है. लेकिन तकनीकी विकास ने भी महिलाओं के लिए रास्ते खोले हैं. कोटेन ब्रुअरी में मशीनें चावल को उठाकर ठंडा करने वाले कन्वेयर पर रख देती हैं और फिर पाइप से अलग कमरे में भेज देती हैं, जहां कोजी तैयार किया जाता है.

मिए बताती हैं, "पहले यह सब हाथ से किया जाता था, लेकिन मशीनों की मदद से अब महिलाएं भी यह काम कर सकती हैं."

साके, जिसे "निहोनशू" भी कहते हैं, चावल और कोजी के साथ फर्मेंटेशन से बनाई जाती है. इस प्राचीन तकनीक को हाल ही में यूनेस्को ने "सांस्कृतिक धरोहर" के रूप में मान्यता दी है.

बचपन में मिए को उनके परिवार की ब्रुअरी में जाने की अनुमति नहीं थी. लेकिन 15 साल की उम्र में जब उन्होंने पहली बार वहां का दौरा किया, तो वह फर्मेंटेशन की प्रक्रिया पर मोहित हो गईं.

मिए कहती हैं, "मैंने देखा कि मिश्रण में बुलबुले उठ रहे थे. यह जानना दिलचस्प था कि ये छोटे-छोटे जीवाणुओं का काम है, जो दिखते भी नहीं. यह महक बहुत अच्छी थी. तब मैंने सोचा कि मैं भी इसे बनाना चाहूंगी."

उन्होंने टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर से फर्मेंटेशन साइंस में डिग्री ली और ग्रेजुएशन के बाद घर लौटकर मास्टर ब्रुअर बनने का फैसला किया. 10 साल तक ट्रेनिंग के बाद, 34 साल की उम्र में वह अपनी ब्रुअरी की तोजी बन गईं.

आसान नहीं है राह

सर्दियां साके उत्पादन का सबसे बड़ा मौसम होता है. तब मिए मौसमी मजदूरों की टीम के साथ काम करती हैं. यह मेहनत वाला काम है, जिसमें भारी चावल उठाना और हजारों लीटर मिश्रण को चलाना शामिल है.

मिए का मानना है कि टीम के साथ तालमेल होना साके के स्वाद में असर डालता है. वह कहती हैं, "कहा जाता है कि अगर ब्रुअरी का माहौल अच्छा हो, तो साके का स्वाद भी अच्छा होता है."

जापानी साके उद्योग 1970 के दशक में अपने चरम पर था, लेकिन बीते सालों में इसमें धीरे-धीरे गिरावट देखी गई है. घरेलू शराब की खपत कम हो रही है और नई तोजी मिलना मुश्किल हो गया है.

कोटेन ब्रुअरी नई तकनीकों और बाजारों की तलाश कर रही है. मिए के भाई इसाओ ताकाहाशी कहते हैं, "हमारा मुख्य उत्पाद हमेशा सूखी साके रही है. लेकिन अब हम उच्च गुणवत्ता वाली साके बनाने की कोशिश कर रहे हैं."

मिए हर साल "मिए स्पेशल" नाम से लिमिटेड-एडिशन साके बनाती हैं. उनके भाई कहते हैं, "मेरी बहन नए-नए तरीके आजमाना चाहती है और मैं इसे बेचने में उसकी मदद करना चाहता हूं."

वीके/एनआर (एपी)

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