देश की खबरें | महिला के अपहरण का आरोपी लुधियाना में छिपा हो सकता है :सीबीआई ने अदालत से कहा

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नयी दिल्ली, 14 जून उम्रकैद की सजा प्राप्त अपराधी और दो साल पहले पैरोल तोड़कर राजकोट से अपने से 29 साल छोटी महिला का कथित तौर पर अपहरण करने वाला 50 वर्षीय व्यक्ति पंजाब के लुधियाना में छिपा हो सकता है।

सीबीआई ने महिला के उसके माता-पिता के पास लौटने के बाद गुजरात उच्च न्यायालय में यह बात कही।

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धवल त्रिवेदी को एक अलग मामले में नाबालिग लड़कियों के उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गयी थी। उसने उच्च न्यायालय से पैरोल मिलने के बाद राजकोट के चोटीला में अंग्रेजी का ट्यूशन केंद्र शुरू किया था।

पीड़ित छात्रा के परिवार का आरोप है कि उस समय 19 साल की स्नातक प्रथम वर्ष की छात्रा उसके ट्यूशन केंद्र में पढ़ने जाती थी, जहां आरोपी ने उसे बहलाया-फुसलाया और बाद में उसे अगवा कर लिया।

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अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई ने पिछले साल एक मई को उच्च न्यायालय के निर्देशों पर मामले को अपने हाथ में लिया और पंजाब, उत्तराखंड तथा गुजरात में उसकी व्यापक तलाश शुरू करने के साथ ही इंटरपोल को भी अलर्ट कर दिया। एजेंसी को अपहर्ता के नेपाल जाने के बारे में सूचनाएं मिली थीं।

अधिकारियों के अनुसार अब 21 वर्ष की हो गयी महिला इस साल जून के पहले सप्ताह में एक साल के बच्चे के साथ माता-पिता के पास लौट आई। त्रिवेदी ने उसे उत्तराखंड में हरिद्वार के पास गैंदी खाता में छोड़ दिया था जहां वह दवा की दुकान चलाता था।

त्रिवेदी से तीखी बहस के बाद महिला ने मार्च में मकान मालिक को उसकी वास्तविक पहचान बता दी थी और अपना पर्दाफाश होने के डर से वह महिला को छोड़कर भाग गया।

अधिकारियों ने बताया कि महिला से शुरुआती पूछताछ में उसने करीब दो साल तक त्रिवेदी के साथ शहर-शहर भटकने की कहानी बताई जो सीबीआई से बचता फिर रहा था।

उनके मुताबिक उन्होंने सिखों की तरह रूप रखकर गुरद्वारों में समय बिताया।

अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी ने अनेक तरीके आजमाए, लेकिन त्रिवेदी एक कदम आगे रहता था। वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था और पीसीओ या अजनबियों के फोन से बात करता था।

सीबीआई ने त्रिवेदी की गिरफ्तारी के लिए सुराग देने वाले को पांच लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। एजेंसी ने अनेक राज्यों की पुलिस की मदद भी इस मामले में ली।

अधिकारियों ने बताया कि जब त्रिवेदी गैंदी खाता से भाग गया तो महिला अहमदाबाद चली गयी और फिर मार्च में महाराष्ट्र चली गयी।

उन्होंने बताया कि इसी दौरान देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गयी। महिला ने इससे ऐन पहले बिहार की ट्रेन ली जिसमें उसे एक मददगार यात्री मिला जिसने उसे शरण दी। लॉकडाउन खत्म होने के बाद वह अपने माता-पिता के पास लौट आई।

घटनाक्रम की जानकारी मिलने के बाद सीबीआई ने उच्च न्यायालय को इस बारे में जानकारी दी।

एजेंसी ने 12 जून को सुनवाई के दौरान अदालत से कहा, ‘‘सीबीआई के समन्वित प्रयासों के चलते महिला ने अपने परिवार के पास लौटने का फैसला किया।’’

सीबीआई ने पीठ को बताया कि आरोपी का पता लगाने के लिए हरसंभव कदम उठाए गए हैं।

एजेंसी ने कहा कि उसने अभी तक देश में सभी बड़े शहरों के पुलिस आयुक्तों और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को सूचित कर दिया है तथा इंटरपोल और आव्रजन अधिकारियों को भी जानकारी दे दी है।

न्यायमूर्ति सोनिया गोकणी और न्यायमूर्ति एन वी अंजरिया की पीठ ने 12 जून के आदेश में इस बात का संज्ञान लिया, ‘‘सीबीआई के अनुसार लुधियाना पुलिस ने उसे नानकसर में देखा था, हालांकि वह पुलिस के पहुंचने से पहले उस जगह से चला गया। लुधियाना की पुलिस आरोपी धवल त्रिवेदी की गतिविधियों पर करीब से नजर रख रही है और उसके गिरफ्तार होने की पूरी संभावना है।’’

पीठ ने सीबीआई को त्रिवेदी का पता लगाने के लिए जांच जारी रखने का निर्देश दिया क्योंकि उसके ऐसे अन्य अपराधों में शामिल होने की पूरी आशंका है।

इसने कहा, ‘‘इस बात की पड़ताल भी जरूरी है कि जेल प्राधिकार ने एक कैदी की जमानत कैसे ले ली। आईजी (जेल) इसकी जांच करें और यदि कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उचित प्रक्रिया के बाद जरूरी कार्रवाई की जाए।’’

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