विदेश की खबरें | विक्रमसिंघे ने राजनीतिक दलों से मतभेद दूर करने, सर्वदलीय सरकार बनाने का आग्रह किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. श्रीलंका के कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने सोमवार को राजनीतिक दलों से अपने मतभेदों को भुलाकर एक ऐसी सर्वदलीय सरकार बनाने का आग्रह किया जो देश को आर्थिक संकट से उबारने में मदद करे। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मदद के संबंध में बातचीत निष्कर्ष के करीब है।

कोलंबो, 18 जुलाई श्रीलंका के कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने सोमवार को राजनीतिक दलों से अपने मतभेदों को भुलाकर एक ऐसी सर्वदलीय सरकार बनाने का आग्रह किया जो देश को आर्थिक संकट से उबारने में मदद करे। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मदद के संबंध में बातचीत निष्कर्ष के करीब है।

इससे पूर्व, उन्होंने देश में आज आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी, जिससे उन्हें बुधवार को होने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रपति चुनाव से पहले व्यापक अधिकार मिल गए हैं।

उन्होंने एक बयान में कहा कि जब उन्होंने 13 मई को प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला था तो तब तक अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी थी।

उनके कार्यालय द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार, कार्यवाहक राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने देश में राजनीतिक दलों से अपने मतभेदों को दूर करने की अपील के साथ ही कहा कि देश को एक व्यक्ति को लेकर मतभेदों का पीड़ित नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से एक साथ आने और एक ऐसी सर्वदलीय सरकार बनाने का आग्रह किया, जो देश को आर्थिक संकट से उबरने में मदद करे।

राष्ट्रपति पद के दावेदारों में से एक विक्रमसिंघे ने कहा कि ईंधन की आपूर्ति के लिए जुलाई का महीना एक कठिन समय होगा। उन्होंने कहा कि हालांकि डीजल का भंडार सुरक्षित कर लिया गया है और यह वितरित किया जा रहा है तथा 21 जुलाई से पेट्रोल का वितरण भी किया जाएगा।

विक्रमसिंघे ने अब तक उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि आईएमएफ के साथ बातचीत निष्कर्ष के करीब है और सहायता के लिए विदेशों के साथ भी चर्चा आगे बढ़ रही है।

राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के मालदीव भाग जाने और फिर सिंगापुर चले जाने के बाद शुक्रवार को विक्रमसिंघे ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। राजपक्षे ने देश से भागने के बाद राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।

विक्रमसिंघे ने कहा कि संविधान के 19वें संशोधन को फिर से पेश किया जाएगा जो जनता की कई चिंताओं को दूर करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज के भीतर ऐसे तत्व हैं जो देश में शांति भंग करने का प्रयास कर रहे हैं और इन तत्वों को देश की प्रगति को बाधित करने से रोका जाएगा।

विक्रमसिंघे ने कहा कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करेगी, जिनकी वैध चिंताएं हैं और समाधान निकाला जाएगा।

इससे पहले, विक्रमसिंघे ने देश में आज आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी, जिससे उन्हें बुधवार को होने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रपति चुनाव से पहले व्यापक अधिकार मिल गए हैं।

उनके इस्तीफे की बढ़ती मांग के बीच इस कदम को विपक्षी नेताओं ने एक "अलोकतांत्रिक कठोर कृत्य" करार दिया।

अशांत देश में आपातकाल की स्थिति लागू करने वाला 17 जुलाई का सरकारी गजट सोमवार सुबह जारी किया गया।

विक्रमसिंघे ने अधिसूचना में कहा कि उनकी राय में सार्वजनिक सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था की सुरक्षा और समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक आपूर्ति तथा सेवाओं के रखरखाव के हित में श्रीलंका में सार्वजनिक आपातकाल लागू करना आवश्यक था।

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