जरुरी जानकारी | प.बंगाल श्रम विभाग ने भत्ते के मुद्दे पर आईजेएमए को सम्मन जारी किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. पश्चिम बंगाल श्रम विभाग ने नौ सप्ताह की लॉकडाऊन की अवधि के दौरान कामगारों को उनके भत्तों का भुगतान नहीं करने के लिए भारतीय जूट मिल संघ (आईजेएमए) को दो जलाई को बातचीत के लिए हाजिर होने का सम्मन जारी किया है।

कोलकाजा, 30 जून पश्चिम बंगाल श्रम विभाग ने नौ सप्ताह की लॉकडाऊन की अवधि के दौरान कामगारों को उनके भत्तों का भुगतान नहीं करने के लिए भारतीय जूट मिल संघ (आईजेएमए) को दो जलाई को बातचीत के लिए हाजिर होने का सम्मन जारी किया है।

श्रम विभाग के 29 जून के एक पत्र में आईजेएमए को बैठक में भाग लेकर जूट क्षेत्र में मौजूदा स्थितियों के बारे में चर्चा करने को कहा है।

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इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार चाहती है कि लॉकडाउन अवधि के दौरान वेतन भत्तों के भुगतान में चूक करने के संबंध में मिल मालिकों के विचारों को सुना जाये। जूट मिलों को शत प्रतिशत कामगारों के साथ एक जून से मिलों को फिर से खोलने की अनुमति दी गई थी।

हालांकि जूट उद्योग आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आता है, लेकिन राज्य सरकार ने लॉकडाऊन के दौरान जूट मिलों को अपने परिचालन को जारी रखने की अनुमति नहीं दी।

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जूट उद्योग के सूत्रों ने कहा कि उक्त बैठक को कलकत्ता उच्च न्यायालय की टिप्पणियों के बाद बुलाया गया है, जिसमें राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि वह जूट उद्योग के साथ एक सार्थक बातचीत करे ताकि श्रमिकों को मिलों की ओर से यथाक्षमता मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित हो।

ट्रेड यूनियनों ने केंद्र की अधिसूचना का हवाला देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, जिस अधिसूचना में उद्योगों से लॉकडाउन अवधि के लिए मजदूरी का भुगतान करने का अनुरोध किया गया था।

वेतन मुद्दे पर लगभग 21 जूट मिल यूनियनें एकजुट हो गई हैं और कहा है कि अगर उनके 2.5 लाख सदस्यों को लॉकडाउन अवधि के लिए सही मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया तो उनके हड़ताल पर जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

आईजेएमए के सूत्रों ने पीटीआई- को बताया कि जूट उद्योग ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के सिद्धांत पर काम करता है और मूल्य निर्धारण प्रणाली इसी पर आधारित है। मिल मालिक मजदूरी की लागत का बोझ उठाने में सक्षम नहीं हैं जो कीमत का 30 प्रतिशत हिस्सा बैठता है। जब तक सरकार यह बोझ अपने ऊपर नहीं लेती या जूट बैग की कीमत में संशोधन नहीं करती, तब तक लॉकडाऊन अवधि के लिए मजदूरी का भुगतान करना संभव नहीं है।

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