विदेश की खबरें | स्पेन-आयरलैंड की ओर से फलस्तीन को मान्यता देने से पहले यूरोपीय संघ और इजराइल के बीच जुबानी जंग
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

मैड्रिड का सुझाव है कि दक्षिणी गाजा शहर रफह में लगातार हमलों के लिए इजराइल के खिलाफ प्रतिबंधों पर विचार किया जाना चाहिए।

इजराइली विदेश मंत्री इजराइल काट्ज ने स्पेन से कहा है कि यरूशलम में उसके वाणिज्य दूतावास को फलस्तीनियों की मदद करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस समय यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेल ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का पुरजोर समर्थन किया है जिसके अभियोजक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और हमास के नेताओं सहित अन्य के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट का अनुरोध कर रहे हैं।

बोरेल ने कहा, ‘‘अदालत के अभियोजक को कड़ी धमकी दी गई और यहूदी विरोधी भावना रखने का आरोप लगाया गया है - हमेशा की तरह जब कोई भी व्यक्ति कुछ ऐसा करता है जो नेतन्याहू की सरकार को पसंद नहीं है।’’

सोमवार को बहुत आक्रोश व्यक्त करने वाले शब्द सामने आये जाब काट्ज ने स्पेन पर फलस्तीन को मान्यता देकर ‘आतंकवाद को बढ़ावा देने’ का आरोप लगाया और कहा कि ‘‘छानबीन के दिन लद गए हैं।’’

काट्ज ने कहा, ‘‘कोई भी हमें अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं करेगा या हमारे अस्तित्व को खतरे में नहीं डालेगा,जो हमें नुकसान पहुंचाएगा, हम बदले में उसे नुकसान पहुंचाएंगे।’’

स्पेन, आयरलैंड और गैर-ईयू सदस्य नॉर्वे ने मंगलवार को फलस्तीन को अपनी मान्यता को आधिकारिक बनाने की योजना बनाई है। पिछले हफ्ते उनकी संयुक्त घोषणा से इजरायली अधिकारियों की नाराजगी बढ़ गई, जिसने तेल अवीव में देशों के राजदूतों को इजरायली विदेश मंत्रालय में बुलाया और उन्हें सात अक्टूबर के हमास हमले और अपहरण के वीडियो दिखाए गए थे।

एपी

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