देश की खबरें | वहीदा रहमान: ‘सीआईडी’ से लेकर ‘स्केटर गर्ल’ तक का सफर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. वह बनना तो चिकित्सक चाहती थीं, लेकिन अभिनय ही उनके जीवन का हिस्सा बन गया। तेलुगू फिल्मों के साथ उन्होंने करियर शुरू किया और फिर श्वेत-श्याम से लेकर रंगीन पर्दे तक मुख्य धारा के सिनेमा की शोभा बढ़ाती रहीं।

नयी दिल्ली, 26 सितंबर वह बनना तो चिकित्सक चाहती थीं, लेकिन अभिनय ही उनके जीवन का हिस्सा बन गया। तेलुगू फिल्मों के साथ उन्होंने करियर शुरू किया और फिर श्वेत-श्याम से लेकर रंगीन पर्दे तक मुख्य धारा के सिनेमा की शोभा बढ़ाती रहीं।

जीवन के साढ़े आठ दशक पूरे कर चुकीं वहीदा रहमान को मंगलवार को 2021 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किये जाने की घोषणा की गई।

उन्होंने अपने सात दशक के सिनेमाई जीवन में 90 से अधिक फिल्मों में काम किया है। हिंदी में वहीदा रहमान की पहली फिल्म 1956 में आई ‘सीआईडी’ थी जिनमें उन्होंने चरित्र भूमिका अदा की थी। इसके बाद वह हिंदी फिल्म जगत की शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार हुईं और पिछले कुछ सालों में संक्षिप्त भूमिका निभाती रहीं।

उन्होंने आखिरी बार दो साल पहले आई फिल्म ‘स्केटर गर्ल’ में काम किया था।

चेन्नई में एक दक्षिण मुस्लिम परिवार में जन्मीं वहीदा ने कभी अदाकारा बनने का सपना नहीं देखा था।

उन्होंने दो साल पहले एक साक्षात्कार में कहा था, ‘‘मैं डॉक्टर बनना चाहती थी, क्योंकि उन दिनों मुस्लिम परिवारों में चिकित्सा ही एकमात्र सम्मानजनक पेशा था।’’

वहीदा को बचपन से कला, संस्कृति और नृत्य में रुचि थी। उनके पिता भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में थे। पिता के सहयोग से उन्होंने भारतनाट्यम सीखने का अपना सपना पूरा किया और फिर फिल्मों की ओर बढ़ गयीं।

साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘‘मैं आइने में देखकर तरह-तरह के चेहरे बनाती थी। जब मेरे पिता ने पूछा कि ऐसा क्यों करती हूं तो मैंने कहा कि मैं लोगों को हंसाना और रुलाना चाहती हूं।’’

उनकी पहली फिल्म तेलुगू की ‘रोजुलू मरायी’ और ‘जयसिम्हा’ थीं। हैदराबाद में संयोग से उनकी मुलाकात गुरुदत्त से हुई और वहीं से उनके जीवन ने नया मोड़ ले लिया।

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