देश की खबरें | मतदाता पहचान पत्र : असम के लिए रिश्तों वाले कॉलम के नियम को बदला गया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुवाहाटी उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करने के बाद असम में मतदाता पहचान पत्र के प्रारूप में विसंगति को ठीक कर दिया गया है। एक याचिकाकर्ता ने शनिवार को यह दावा किया।
गुवाहाटी, 24 सितंबर गुवाहाटी उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करने के बाद असम में मतदाता पहचान पत्र के प्रारूप में विसंगति को ठीक कर दिया गया है। एक याचिकाकर्ता ने शनिवार को यह दावा किया।
हाल के दिनों में जारी मतदाता पहचान पत्र में पिता/पति के नाम के स्लॉट में विसंगति को ठीक किया गया है, जबकि पहले जारी किए गए मतदाता कार्ड के संबंध में इसे एक विशिष्ट फॉर्म भरकर बदला जा सकता है। पूर्व सांसद, याचिकाकर्ता जयश्री गोस्वामी महंत ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमने 2016 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में इस मामले पर एक रिट याचिका दायर की थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अन्य सभी राज्यों में मतदाता पहचान पत्र में मतदाता के नाम के नीचे ‘पिता/पति के नाम’ के लिए एक स्लॉट होता है, उस स्लॉट को असम के लिए ‘रिलेशन नेम’ के रूप में चिह्नित किया गया था।’’
पूर्व सांसद ने कहा, ‘‘हम चाहते थे कि अन्य राज्यों की तरह ही यहां भी इसी नियम का पालन किया जाए।’’
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उच्च न्यायालय ने भारत निर्वाचन आयोग से इस मामले में एक हलफनामा दाखिल करने को कहा था, लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहा। जब इस महीने फिर से सुनवाई के लिए मामला आया, तो निर्वाचन आयोग के वकील ने अदालत को बताया कि रिट याचिका में उठाए गए मुद्दों का निराकरण किया गया है। वकील ने मतदाता पहचान पत्र जारी करने से पहले मतदाताओं के सभी विवरण एकत्र करने वाले फॉर्म 6 को भी रिकॉर्ड में रखा, जिसमें विशेष रूप से ‘पिता/पति के नाम’ के लिए एक स्लॉट चिह्नित किया गया था।
न्यायमूर्ति संजय कुमार मेधी ने बुधवार को पारित अपने आदेश में कहा कि रिट याचिका में की गई शिकायत का निर्वाचन आयोग द्वारा याचिका के लंबित रहने के दौरान ‘समाधान’ किया गया है।
महंत ने कहा, ‘‘हमें खुशी है कि इस मुद्दे का निराकरण किया गया है, लेकिन निर्वाचन आयोग हमें कोई जवाब नहीं दे सका कि यह विसंगति क्यों सामने आई, जब हमने अदालत जाने से पहले उनसे संपर्क किया था।’’
असम गण परिषद की पूर्व राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘राजनीतिक साजिश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है, हालांकि हम इस बारे में अटकलें नहीं लगाना चाहते हैं।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या वह इस मामले को आगे बढ़ाएंगी कि विसंगति केवल असम के मामले में ही क्यों हुई, याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
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