जरुरी जानकारी | वोडाफोन आइडिया को बकाया लौटाने में करना पड़ सकता है मुश्किलों का सामना: विश्लेषक

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नयी दिल्ली, एक सितंबर उच्चतम न्यायालय के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) मामले में निर्णय के बाद विश्लेषकों ने कहा कि वोडाफोन आइडिया लि. (वीआईएल) को बकाया लौटाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

ब्रोकरेज कंपनी मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि वोडाफोन आइिया को समय मुताबिक भुगतान करने में समस्या हो सकती है लेकिन भारती एयरटेल के साथ ऐसा नहीं है।

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उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज जैसी कंपनियों को दूरसंचार विभाग (डीओटी) को समायोजित सकल राजस्व से संबंधित बकाया चुकाने के लिए कुछ शर्तों के साथ दस साल का समय दिया।

न्यायालय ने अपने फैसले में दूरसंचार कंपनियों को एजीआर मद में अनुमानित 1.6 लाख करोड़ रुपये के बकाये के भुगतान के लिये 20 साल का समय दिये जाने से इनकार कर दिया।

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वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल ही निजी क्षेत्र की कंपनियां हैं, जो कीमत घटाने की आक्रमक होड़ में बाजार में टिकी हुई हैं। कीमत घटाने की शुरूआत मुकेश अंबानी की कंपनी जियो के बाजार में आने के साथ हुई।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि आठ प्रतिशत ब्याज को अगर माना जाए तो भारती एयरटेल और वीआईएल को सालाना क्रमश: 3,900 करोड़ रुपये और 7,500 करोड़ रुपये देने पड़ सकते हैं।

ब्रोकरेज कंपनी के अनुसार शून्य प्रतिशत ब्याज पर दोनों को क्रमश: 2,600 करोड़ रुपये और 5,000 करोड़ रुपये देने होंगे।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रमुख (इक्विटी रणनीति, ब्रोकिंग और वितरण) हेमांग जैन ने कहा कि भुगतान को लेकर अभी ब्याज दर के बारे में चीजें साफ नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह उम्मीद है कि भारती एयरटेल को भुगतान करने में समस्या नहीं होगी। शुल्क दर बढ़ाये बिना कंपनी का एफसीएफ (मुक्त नकद प्रवाह) 2019-20 में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा। वहीं वीआईएल का ईबीआईटीडीए (ब्याज, कर, मूल्य ह्रास और एर्मोटाइजेशन से पहले आय) 6,000 करोड़ रुपये और सालाना भुगतान 25,000 करोड़ रुपये से अधिक है। ऐसे में इसके लिये भुगतान करना मुश्किल हो सकता है।’’

जानी ने कहा, ‘‘यह भारती और आआईएल के लिये सकारात्मक है। क्योंकि एयरसेल और वीडियोकॉन की देनदारी का असर भारती पर नहीं होगा और आर कॉम की देनदारी का असर आर जियो पर नहीं होगा। दोनों ने उनके स्पेक्ट्रम का अधिग्रहण किया है।’’

केएस लीगल एंड एसोसएिट्स की प्रबंध भागीदार सोनम चांदवानी ने कहा कि भुगतान अवधि से पहले जिन दूरसंचार कंपनियों के लाइसेंस की अवधि समाप्त हो रही है, उनके लिये ‘चिंता का विषय है।’

उन्होंने कहा, ‘‘...दूरसंचार कंपनियों के पास दो विकल्प हैं। पहला, दस साल की भुगतान सीमा के भीतर उस लाइसेंस का नवीनीकरण करायें, जिसकी मियाद समाप्त हो रही है।(या फिर लाइसेंस का नवीनीकरण न कराएं) ऐसी आशंका है कि कुछ कंपनियां लाइसेंस नवीनीकरण कराने में विफल रहें।’’

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