देश की खबरें | विकास दुबे उज्जैन से गिरफ्तार, फूल बेचने वाले ने दी थी जानकारी: पुलिस अधीक्षक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी विकास दुबे को उसके दो साथियों के साथ पुलिस ने बृहस्पतिवार सुबह मध्य प्रदेश में उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के परिसर से गिरफ्तार कर लिया।

भोपाल/उज्जैन, नौ जुलाई उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी विकास दुबे को उसके दो साथियों के साथ पुलिस ने बृहस्पतिवार सुबह मध्य प्रदेश में उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के परिसर से गिरफ्तार कर लिया।

महाकाल मंदिर के बाहर फूल-प्रसाद बेचने वाले दुकानदार राजेश माली उर्फ सुरेश माली ने दुबे को बृहस्पतिवार सुबह करीब सात बजे सबसे पहले पहचाना और उसकी दी गई सूचना के आधार पर ही दुबे को बाद में गिरफ्तार किया गया।

यह भी पढ़े | पीएम मोदी 750 मेगावाट की रीवा सोलर पॉवर प्लांट कल राष्ट्र को करेंगे समर्पित, दिल्ली मेट्रो को भी यहां से मिलेगी बिजली.

उज्जैन के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार रात को संवाददाताओं को बताया, ''विकास दुबे को आज मध्य प्रदेश की उज्जैन पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।''

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने दो दिन पहले पूरे जिले की पुलिस की बैठक की थी। सबको सतर्क किया गया था और जिले में गुंडा विरोधी अभियान के बारे में बताया गया था। हमने जून में करीब 100 गुंडों के खिलाफ कार्रवाई की।’’

यह भी पढ़े | विकास दुबे की गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसकी पत्नी और बेटे को लिया हिरासत में, पूछताछ के लिए किसी अज्ञात जगह ले गई.

सिंह ने बताया, ''बाहर से आने वाले बदमाशों के खिलाफ भी हम सघन जांच कर रहे हैं। विकास दुबे बृहस्पतिवार सुबह महाकाल दर्शन के लिए मंदिर परिसर में पहुंचा। वह वहां राजेश माली उर्फ सुरेश माली की दुकान पर फूल-प्रसाद लेने पहुंचा।’’

उन्होंने बताया कि चूंकि टेलीविजन चैनलों में दिखाया जा रहा था कि दुबे वांछित है, तो माली को शक हुआ कि फूल-प्रसाद लेने पहुंचा व्यक्ति दुबे है।

उन्होंने बताया कि राजेश माली ने सबसे पहले महाकाल परिसर में निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मियों को इस बारे में जानकारी दी।

सिंह ने बताया कि दुबे ने महाकाल मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए निर्गम द्वार पर 250 रूपये का टिकट लिया।

उन्होंने कहा, ''जैसे ही दुबे ने मंदिर में अंदर प्रवेश किया तो सुरक्षा एजेंसी के कर्मियों ने महाकाल चौकी में हमारे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस बारे में सूचित किया। उसके बाद उन्होंने उस पर निगरानी रखनी शुरू की।''

सिंह ने बताया कि दर्शन करने के बाद जब दुबे निर्गम द्वार पर आया, तो उन लोगों ने उससे उसका नाम पूछा। उसने अपना गलत नाम बताया और फर्जी पहचान पत्र दिखाया। उसके बाद जब कर्मियों ने सख्ती से उससे पूछताछ की, तो उसने बताया कि वह विकास दुबे है।

उन्होंने बताया कि इसके बाद उसे तत्काल थाना ले जाया गया और सभी वरिष्ठ अधिकारी थाने पहुंचे।

सिंह ने कहा, ‘‘उससे पूछताछ की गई। वह विकास दुबे ही है, इस बात की पुष्टि करने के लिए हमने उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस से तत्काल संपर्क किया। कानपुर पुलिस अधीक्षक से हमारी कई बार बात हुई। हमने उत्तर प्रदेश में एसटीएफ से बात की। हमने दुबे का फोटो मंगवाया और जांच की।’’

सिंह ने बताया कि उसके बाद उत्तर प्रदेश से विशेष कार्य बल (एसटीएफ) उज्जैन पहुंचा।

उन्होंने कहा, ''हमने विकास दुबे को उत्तर प्रदेश से आए एसटीएफ कर्मियों के हवाले कर दिया है और एसटीएफ के कर्मी दुबे को लेकर बृहस्पतिवार रात उत्तर प्रदेश रवाना हो गए।’’

उन्होंने कहा कि जांच के दौरान मिलने वाले सभी साक्ष्यों से उत्तर प्रदेश पुलिस को अवगत कराया जाएगा।

सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश पुलिस ने दुबे के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है और उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश में मामला पहले से ही दर्ज है।

जब उनसे सवाल किया गया कि यह गिरफ्तारी है या आत्मसमर्पण, तो उन्होंने कहा, ‘‘ मैं बार-बार कह रहा हूं। पूरा घटनाक्रम आपके सामने रख रहा हूं कि सुरेश माली को पहले खबर लगी। उसने बाकी लोगों को बताया।''

इससे पहले मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल में मीडिया को बताया, ''हमने दुबे को गिरफ्तार कर लिया है। वर्तमान में वह उज्जैन पुलिस की हिरासत में है। उसके दो साथी - बिट्टू और सुरेश - भी महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किए गये हैं।''

उन्होंने कहा कि दुबे की गिरफ्तारी से मध्य प्रदेश पुलिस एवं मध्य प्रदेश के खुफिया विभाग को एक बड़ी सफलता मिली है।

जब उनसे सवाल किया गया कि इतनी सतर्कता बरते जाने के बावजूद दुबे मध्य प्रदेश कैसे आ सकता है, तो मिश्रा ने कहा, ''सतर्क होने के कारण ही वह पकड़ा गया है। रेल चलती हैं। बसें चलती हैं। साधन हैं।''

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले को लेकर परस्पर संपर्क में हैं।

मिश्रा ने कहा कि निश्चित रूप से विकास दुबे प्रारंभ से ही क्रूरता की हदें पार करता रहा है और उसने जो कृत्य किया है, वह बहुत निंदनीय और बहुत चिंतनीय था।

मिश्रा ने कहा, ‘‘ उसे :विकास दुबे: जिंदा रहने का हक नहीं है।’’

उन्होंने बताया कि वारदात होने के बाद से ही पूरे प्रदेश की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया था।

मंदिर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गिरफ्तार होने से पहले दुबे बृहस्पतिवार सुबह महाकाल मंदिर के गेट पर पहुंचा था और उसने वीआईपी गेट से प्रवेश करने के लिए मंदिर परिसर स्थित एक पुलिस चौकी के पास से 250 रूपये की रसीद भी कटवाई थी।

लॉकर रूम में काम करने वाले गोपाल कुशवाह ने कहा, ''विकास दुबे आया था और उसने मुझसे पूछा था कि बैग एवं जूते कहां रखने हैं। वह बैग रख कर चला गया था। बाद में उसे पकड़ लिया गया। उसने भागने की कोशिश भी की थी।''

एक सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि उसे पास के ही महाकाल पुलिस थाने में ले जाया गया। पुलिस उसे पकड़ने के बाद पैदल ही पास स्थित महाकाल पुलिस थाने ले गई।

बाद, में पुलिस जब दुबे को पुलिस वाहन में बैठा रही थी, तब वह जोर—जोर से चिल्ला रहा था, ‘‘मैं विकास दुबे हूं, कानपुर वाला’’ और एक पुलिसकर्मी उसे चांटा मार रहा था। इस घटना का एक वीडियो वायरल हुआ है।

वहीं, उज्जैन जिलाधिकारी आशीष सिंह ने मीडिया को बताया, ''दुबे को महाकाल में तैनात सुरक्षाकर्मी ने पकड़ा। मौके पर हल्की झड़प भी हुई।''

गौरतलब है कि गत दो-तीन जुलाई की मध्यरात्रि को गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने गए पुलिस दल पर उसके गुर्गों ने गोलीबारी कर आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\