देश की खबरें | तेजाब हमले के पीड़ित को विकलांग अधिकार अधिनियम के तहत क्षतिपूर्ति का हक है: अदालत

मुंबई, सात अक्टूबर बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि तेजाब हमले के पीड़ित विकलांग अधिकार अधिनियम के तहत क्षतिपूर्ति एवं पुनर्वास लाभ के हकदार हैं। उसने इस कथन के साथ ही महाराष्ट्र सरकार को शहर के एक तेजाब पीड़ित को 10 लाख रूपये देने का निर्देश दिया है।

इस सप्ताह के प्रारंभ में जारी किये गये अपने आदेश में न्यायमूर्ति उज्जल भूयान और न्यायमूर्ति माधव जामदार की पीठ ने राज्य सरकार को पीड़ित महिला को 2016 के कानून के तहत मुआवजे का भुगतान करने और चेहरे की सर्जरी तथा अन्य चिकित्सकीय खर्च भी उठाने का निर्देश दिया।

पीठ दो बच्चों की मां एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसपर 2010 में उसके पति ने हमला किया था।

इस आदेश के अनुसार महिला के पति ने तब उसके चेहरे पर तेजाब डाल दिया था जब वह सो रही थी। फलस्वरूप वह बुरी तरह झुलस गयी।

अदालत ने कहा कि महिला ने इलाज पर पांच लाख रूपये खर्च किये लेकिन उसे राज्य सरकार से कोई मुआवजा नहीं मिला।

उसने कहा, ‘‘ यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत के संविधान के अनुच्छेछ 21 के तहत याचिकाकर्ता का अर्थपूर्ण जीवन जीने, गरिमा के साथ जीवनयापन करने का अधिकार दूर का एक सपना ही है।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में यह रिट अदालत यदि याचिकाकर्ता को उचित मुआवजे के भुगतान और उसके पुनर्वास उपायों का निर्देश नहीं देता है तो वह अपने कर्तव्य निर्वहन में विफल होगी।

अदालत ने राज्य सरकार को तीन महीने के अंदर मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘ 2016 के अधिनियम के तहत तेजाब हमले को एक व्यक्ति को विशेष विकलांगता से ग्रस्त समझा जाएगा। ’’

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