देश की खबरें | आसन संरक्षण रिजर्व रामसर से मान्यता प्राप्त उत्तराखंड की पहली आर्द्रभूमि

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर भारत में अब 38 आर्द्रभूमि हैं जो कि दक्षिण एशिया में सबसे अधिक है। रामसर सम्मेलन संधि के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की मान्यता वाली सूची में एक और आर्द्रभूमि जुड़ी है।

देहरादून स्थित आसन संरक्षण रिजर्व उत्तराखंड में रामसर से मान्यता प्राप्त करने वाला पहली आर्द्रभूमि है।

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संधि पर 1971 में ईरान के शहर रामसर में हस्ताक्षर किये गए थे। यह आर्द्रभूमि के पारिस्थितिक चरित्र के संरक्षण के लिए सबसे पुराने अंतर-सरकारी समझौतों में से एक है। इसे आर्द्रभूमि पर संधि के तौर भी जाना जाता है। इसका उद्देश्य जैविक विविधता का संरक्षण और मानव जीवन को बनाए रखने के लिए आर्द्रभूमि का एक वैश्विक तंत्र विकसित करना है।

पर्यावरण मंत्रालय ने कहा, ‘‘रामसर आसन संरक्षण रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित करता है। इसके साथ ही, भारत में रामसर स्थलों की संख्या 38 हो गई है, जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक है। यह उत्तराखंड में रामसर के तहत मान्यता प्राप्त करने वाली पहली आर्द्रभूमि है। आसन संरक्षण रिजर्व में दुर्लभ प्रजातियां पायी जाती हैं। यहां मछलियां अंडे देती हैं और यहां काफी संख्या में जैव विविधता है।’’

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रामसर सूची का उद्देश्य ‘‘आर्द्रभूमि के एक अंतरराष्ट्रीय तंत्र का विकास और रखरखाव करना है जो वैश्विक जैविक विविधता के संरक्षण और उनके पारिस्थितिक तंत्र के घटकों, प्रक्रियाओं और लाभों के रखरखाव के माध्यम से मानव जीवन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।’’

आर्द्रभूमि भोजन, पानी, फाइबर, भूजल रिचार्ज, जल शोधन, कटाव नियंत्रण और जलवायु विनियमन जैसे महत्वपूर्ण संसाधन और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करती है। वे वास्तव में, पानी का एक बड़ा स्रोत है और हमारे मीठे पानी की मुख्य आपूर्ति आर्द्रभूमि से होती है जो वर्षा जल को सोखने और भूजल को रिचार्ज करने में मदद करती है।

सरकार ने इस साल फरवरी में 10 और स्थल प्रस्तावित किये थे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थलों के रूप में घोषित किया जाना था, जिसमें आसन संरक्षण रिजर्व भी शामिल है।

रामसर साइट के रूप में घोषित आर्द्रभूमि सख्त दिशानिर्देशों के तहत संरक्षित हैं। अगर रामसर सचिवालय द्वारा नौ अन्य प्रस्तावित आर्द्रभूमि को मंजूरी दी जाती है, तो भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 47 संरक्षित स्थल होंगे।

रामसर संधि में 170 से अधिक देश शामिल हैं और इसके तहत 20 करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले 2,000 निर्दिष्ट स्थलों को मान्यता दी गई है।

इस वर्ष जनवरी में, रामसर सम्मेलन द्वारा भारत में 10 आर्द्रभूमि को अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थलों के रूप में मान्यता दी गई थी। इनमें महाराष्ट्र में नंदुर मदमहेश्वर, केशोपुर-मियानी, ब्यास संरक्षण रिजर्व, नंगल, पंजाब और उत्तर प्रदेश में नवाबगंज, पार्वती आगरा, समन, समसपुर, सांडी और सरसाईनार शामिल हैं।

अन्य रामसर स्थल राजस्थान, केरल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर, आंध्र प्रदेश, मणिपुर, गुजरात, तमिलनाडु, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश में स्थित हैं।

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