विदेश की खबरें | अमेरिका के उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश गिन्सबर्ग का निधन
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वाशिंगटन, 19 सितंबर अमेरिका के उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश रुथ बाडेर गिन्सबर्ग का कैंसर से शुक्रवार को निधन हो गया। वह 87 वर्ष की थीं और उन्हें महिला अधिकार और सामाजिक न्याय का पुरोधा माना जाता है।
अमेरिका की शीर्ष अदालत में न्यायाधीश के पद पर पहुंचने वाली गिन्सबर्ग दूसरी महिला थीं। उन्होंने पूरी जिदंगी लैंगिक समानता की वकालत की और उनकी ख्याति सतर्क और संयमित न्यायाधीश की रही।
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उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट ने उनके निधन पर कहा, ‘‘ हमारे देश ने ऐतिहासिक कद की न्यायमूर्ति को खो दिया। हमने उच्चतम न्यायालय में एक प्यारी साथी को खो दिया। आज हम शोकाकुल हैं लेकिन इस भरोसे के साथ की आने वाली पीढ़ी रूथ बाडेर गिन्सबर्ग को वैसे ही याद करेगी जैसा हम- न्याय के लिए अथक प्रयास करने वाली और दृढ़ महिला के रूप - जानते हैं।
गौरतलब है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने गिन्सबर्ग को अमेरिका के उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश पद पर नामित किया था। वह करीब 27 साल से इस पद पर थीं और कुछ साल से कैंसर से पीड़ित थीं।
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गिन्सबर्ग की मौत तीन नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव से 50 दिन से भी कम समय पहले हुई है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प् और उनके प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार एवं पूर्व उप राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच नया मोर्चा खुलने की उम्मीद है।
राष्ट्रपति ट्रम्प् ने कहा, ‘‘आप चाहे उनसे सहमत हो या नहीं, वह एक अद्भुत महिला थीं, जिन्होंने अद्भुत जीवन जिया।’’
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गिन्सबर्ग को अथक याचिकाकर्ता और निर्णायक न्यायविद करार दिया।
इस बीच, हिल अखबार ने अज्ञात स्रोतों के हवाले से कहा है कि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का नेतृत्व उम्मीद कर रहा है कि ट्रम्प सर्किट न्यायाधीश एमी कोने बैरेट और अमूल थापर का नाम इस पद के लिए आगे करेंगे।
वर्ष 2016 के चुनाव से पहले भारतीय अमेरिकी थापर को ट्रम्प ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद पर नामांकित करने के लिए चुना था। मौजूदा समय में वह छठे सर्किट की अपीली अदालत में कार्यरत हैं।
वहीं सीनेट में बहुमत के नेता मिच मैक्कॉनेल ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा जिसे में भी नामित किया जाता है सीनेट उसपर यथाशीघ्र मतदान करने को इच्छुक है।
बाइडेन ने इसपर असहमति जताई है। उन्होंने कहा, ‘‘ मतदाताओं को राष्ट्रपति चुनना चाहिए और राष्ट्रपति को उस व्यक्ति का चुनाव करना चाहिए जिसे न्यायाधीश पद पर नियुक्त किया जाना है।’’
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