विदेश की खबरें | अफगानिस्तान में छूटे लोगों को लेकर अमेरिका का अनुमान काफी कम: बचाव समूह

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. कुछ समूहों का कहना है कि वे अफगानिस्तान में अमेरिकी दूतावास बंद होने से पहले पंजीकरण नहीं करा पाने वाले अमेरिकी नागरिकों के लगातार संपर्क में हैं। ग्रीन कार्ड धारक के तौर पर उन्होंने कई साल अमेरिका में बिताए. कर का भुगतान किया और अपने समुदायों के सदस्य बने। इनमें से कई लोगों के बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि उसके पास इस बारे में कोई अनुमान नहीं है कि अफगानिस्तान में ऐसे कितने स्थायी निवासी हैं और तालिबान के शासन से भागने को बेताब हैं।

कुछ समूहों का कहना है कि वे अफगानिस्तान में अमेरिकी दूतावास बंद होने से पहले पंजीकरण नहीं करा पाने वाले अमेरिकी नागरिकों के लगातार संपर्क में हैं। ग्रीन कार्ड धारक के तौर पर उन्होंने कई साल अमेरिका में बिताए. कर का भुगतान किया और अपने समुदायों के सदस्य बने। इनमें से कई लोगों के बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि उसके पास इस बारे में कोई अनुमान नहीं है कि अफगानिस्तान में ऐसे कितने स्थायी निवासी हैं और तालिबान के शासन से भागने को बेताब हैं।

सैन डिएगो में कैजन वैली यूनियन स्कूल डिस्ट्रिक्ट समूह ऐसे ही एक परिवार के संपर्क में है, जिसका कहना है कि वे बाहर नहीं निकल सकते।

समूह के प्रवक्ता होवार्ड ने कहा, ''डर इस बात का है कि उनका कोई रखवाला नहीं है। वे हजारों मील दूर बर्बर शासन में जी रहे हैं और हम उन्हें वहां छोड़ आ गए हैं। यह ठीक नहीं है।''

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने वादा किया था कि अफगानिस्तान से निकलने के इच्छुक 100 से 200 अमेरिकियों कों निकालने के प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने कहा था कि इनमें से अधिकतर दोहरी नागरिकता धारक हैं।

कैलिफोर्निया के तीन जिला स्कूलों का कहना है कि उनके यहां पढ़ने वाले 30 से अधिक बच्चे अफगानिस्तान से वापस नहीं लौट पाए हैं। वर्षों से सैक्रामेंटो में रहने वाला एक परिवार अफगानिस्तान से निकलने की कोशिश कर रहा है। इसके लिये वह अपने बच्चों के प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल को रोजाना संदेश भेज रहा है। माता-पिता और तीन बच्चों का यह परिवार बच्चों की बीमार दादी को देखने के लिये अप्रैल में अफगानिस्तान गया था। ये सभी कानूनी रूप से अमेरिका के निवासी हैं।

एपी

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