नयी दिल्ली, दो जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान हालिया मजदूर संकट दर्शाता है कि ऐसी स्थितियों में कामगारों के कल्याण के वास्ते समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए श्रमिकों से संबंधित एक उचित डेटा उपलब्धता की तत्काल आवश्यकता है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि डेटा संग्रह को एकीकृत किए जाने की आवश्यकता है जिससे कि प्रवासी मजदूरों से संबंधित ब्योरा केंद्र और राज्यों से लिया जा सके, जिसकी जांच की जा सके और जो आसानी से उपलब्ध हो सके।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रवासी मजदूरों के लिए कोई कदम उठाने के वास्ते इस तरह का ब्योरा अत्यंत महत्व का है।’’
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘उपरोक्त उद्देश्य के लिए, सरकार विचार करेंगी कि क्या ठेकेदारों या नियोक्तओं द्वारा प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण के लिए कोई केंद्रित पोर्टल होना चाहिए। इसके लिए तंत्र भी उपलब्ध भी होना चाहिए जिससे कि नियोक्तओं और ठेकेदारों को कोई परेशानी न हो और वे डेटा बिना किसी खामी के जमा कर सकें।’’
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यह आदेश उस याचिका पर आया जिसमें केंद्र और दिल्ली सरकार को यह आदेश देने का आग्रह किया गया था कि वे अंतरराज्यीय प्रवासी कामगार (रोजगार नियमन और सेवा शर्त) कानून 1979 का राष्ट्रीय राजधानी में क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र स्थापित करें।
अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को इस संबंध में हलफनामे दायर करने का निर्देश दिया।
इसने साथ ही श्रम मंत्रालय और दिल्ली सरकार को कानून के तहत पंजीकृत प्रतिष्ठानों की संख्या, ठेकेदारों को जारी लाइसेंसों की संख्या, कानून के अंदर घोषित अंतरराज्यीय मजदूरों की संख्या और कानून के तहत नियुक्त अधिकारियों की संख्या के बारे में स्थिति रिपोर्ट दायर करने का भी निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने दोनों सरकारों से सुनवाई की अगली तारीख 29 जून से पहले हलफानामा दायर करने को कहा।
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