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देश की खबरें | उपहार अग्निकांड : रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर अंसल बंधुओं से जवाब तलब

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड में सबूतों से छेड़छाड़ के लिए रियल एस्टेट कारोबारी सुशील तथा गोपाल अंसल से उनकी सजा बढ़ाए जाने का अनुरोध करने वाली पीड़ितों की याचिका पर सोमवार को जवाब मांगा।

देश की खबरें | उपहार अग्निकांड : रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर अंसल बंधुओं से जवाब तलब

नयी दिल्ली, पांच सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड में सबूतों से छेड़छाड़ के लिए रियल एस्टेट कारोबारी सुशील तथा गोपाल अंसल से उनकी सजा बढ़ाए जाने का अनुरोध करने वाली पीड़ितों की याचिका पर सोमवार को जवाब मांगा।

अंसल बंधुओं को इस आधार पर जेल से रिहा कर दिया गया कि वे आठ नवंबर 2021 से ही जेल में बंद थे और उन्होंने पहले ही सजा काट ली है।

गौरतलब है कि एक मजिस्ट्रेट अदालत ने आठ नवंबर 2021 को रियल एस्टेट कारोबारियों को सात साल की जेल की सजा सुनायी थी तथा तब से वे जेल में ही बंद थे।

इसके बाद जिला न्यायाधीश ने 19 जुलाई को सजा पर मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में संशोधन किया था और अंसल बंधुओं, अदालत के पूर्व कर्मचारी दिनेश चंद शर्मा तथा अंसल बंधुओं के तत्कालीन कर्मचारी पी पी बत्रा की रिहाई का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि ये लोग आठ नवंबर 2021 से ही जेल में बंद है तथा इसे ही पूरी सजा मानते हुए उन्हें रिहा कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति आशा मेनन ने ‘एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ उपहार ट्रेजडी’ (एवीयूटी) की याचिका पर अंसल बंधुओं और प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया तथा उनसे जवाब मांगा। अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए 11 अक्टूबर की तारीख तय की।

सुनवाई के दौरान प्रदेश की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे याचिका का समर्थन करते हैं और जेल की सजा पहले ही काट लेने पर अंसल बंधुओं को रिहा करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देंगे।

वरिष्ठ वकील विकास पहवा ने याचिकाकर्ता संगठन की पैरवी करते हुए सजा पर निचली अदलत के आदेश को चुनौती दी तथा अनुरोध किया कि दोषी जेल की पूरी सात साल की सजा काटें।

बहरहाल, जिला न्यायाधीश ने सुशील तथा गोपाल अंसल में से प्रत्येक पर लगाए 2.25 करोड़ रुपये के जुर्माने तथा दो अन्य पर लगाए तीन-तीन लाख रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा था।

याचिका में कहा गया है कि जिला न्यायाधीश इस पर गौर करने में नाकाम रहे कि सबूतों से छेड़छाड़ का अपराध गंभीर किस्म का है क्योंकि इसका पूरे आपराधिक न्यायिक तंत्र पर असर पड़ता है।

यह मामला अग्निकांड के मुख्य मामले में सबूतों से छेड़छाड़ से जुड़ा है। अग्निकांड के मुख्य मामले में उच्चतम न्यायालय ने अंसल बंधुओं को दोषी ठहराया था और उन्हें दो साल की जेल की सजा सुनायी थी।

हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने जेल में बितायी गयी अवधि पर गौर करते हुए उन्हें इस शर्त पर रिहा कर दिया था कि वे 30-30 करोड़ रुपये का जुर्माना देंगे, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय राजधानी में एक ट्रामा सेंटर के निर्माण के लिए किया जाएगा।

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(The above story first appeared on LatestLY on Sep 05, 2022 03:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).