देश की खबरें | सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल के लिए टीकाकरण अनिवार्य करने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण : अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बम्बई उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि उपनगरीय सवारी रेलगाड़ियों सहित सभी सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के लिए पूर्ण टीकाकरण की अनिवार्यता संबंधी नियम को जारी रखने का महाराष्ट्र सरकार का फैसला मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

मुंबई, दो मार्च बम्बई उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि उपनगरीय सवारी रेलगाड़ियों सहित सभी सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के लिए पूर्ण टीकाकरण की अनिवार्यता संबंधी नियम को जारी रखने का महाराष्ट्र सरकार का फैसला मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की पीठ ने कहा कि अदालत को राज्य सरकार द्वारा जारी कई मानक परिचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को ‘स्वत: अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल’ करके रद्द कर देना चाहिए था।

पीठ ने कहा, ‘‘यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य सरकार प्रत्येक व्यक्ति के टीकाकरण कराने पर जोर दे रही है। इसमें व्यक्तिगत इच्छा का सवाल नहीं है। एक तरफ तो आप कहते हैं कि यह स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं और दूसरी ओर आप ऐसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को टीकाकरण कराना होगा।’’

पीठ ने नाराजगी भरे लहजे में कहा, ‘‘हमने इस जनहित याचिका को केवल तीन एसओपी के दायरे में बांध दिया। हमें आगे आकर 10 अगस्त, 2021 को जारी सम्पूर्ण अधिसूचना निरस्त कर देना चाहिए था, लेकिन हमें उम्मीद थी कि राज्य सरकार तार्किक फैसला लेगी।’’ पीठ ने यह भी कहा कि यह अदालत के लिए ‘सीख’ है।

अदालत सरकार द्वारा जुलाई और अगस्त 2021 में जारी तीन एसओपी को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि कोविड-19 रोधी टीकों की दोनों खुराक लेने वाले यात्रियों को ही लोकल ट्रेन और अन्य सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल करने की इजाजत होगी।

राज्य सरकार के वकील अनिल अंतुरकर ने बुधवार को सूचित किया कि राज्य कार्यकारी समिति की 25 फरवरी को बैठक हुई और पूर्ण रूप से टीकाकरण न कराये व्यक्तियों को सार्वजनिक वाहनों में यात्रा से प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया है।

अंतुरकर ने एक मार्च को तैयार मसौदा एसओपी की एक प्रति अदालत को भी सौंपी, जिसे अभी प्रकाशित नहीं किया गया है। इसमें पूर्ण टीकाकरण कराये व्यक्ति को ही सार्वजनिक परिवहनों में यात्रा की अनुमति दी गयी है।

पीठ ने याचिकाकर्ता वकील नीलेश ओझा और तनवीर निजाम की याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें नयी याचिका दायर करने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता या तो मौजूदा पीआईएल में सुधार कर सकते हैं या नयी याचिका दायर कर सकते हैं।

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