नयी दिल्ली, 16 जुलाई मौसम विज्ञानियों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि असमान मानसून ने भले ही देश में खरीफ फसलों की बुवाई को प्रभावित किया हो, लेकिन उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति को लेकर घबराना या चिंता करना जल्दबाजी होगी।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि 15 जुलाई तक धान की खेती का रकबा 17.38 प्रतिशत घटकर 128.50 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले साल 155.53 लाख हेक्टेयर था।
हालांकि, मंत्रालय ने कहा है कि खरीफ फसलों के रकबे में अभी तक की कमी चिंता का विषय नहीं है और इस महीने मानसून की बारिश की प्रगति के साथ इस अंतर को पाटा जाएगा।
मानसून देश की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा है और इससे शुद्ध बुवाई के रकबों के 60 प्रतिशत भाग की सिंचाई होती है। भारत की लगभग आधी आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है।
मौसम विभाग ने इस साल सामान्य मॉनसून रहने की भविष्यवाणी की है। एक जून को मानसून के मौसम की शुरुआत के बाद से अब तक देश में 14 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है, लेकिन वितरण असमान रहा है।
जहां दक्षिण और मध्य भारत में अतिरिक्त बारिश हुई, वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कमी दर्ज की गई है।
स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन) महेश पलावत ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के चावल उत्पादक राज्यों में कम बारिश हुई है।’’
उत्तर प्रदेश में सामान्य से 65 प्रतिशत कम बारिश हुई है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 15 जुलाई तक क्रमश: 42 प्रतिशत, 49 प्रतिशत और 24 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
बारिश की कमी ने इस क्षेत्र में मुख्य खरीफ फसल धान की बुवाई को प्रभावित किया है।
पलावत ने कहा कि अधिक बारिश से मध्य भारत में कई स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है और तिलहन, अनाज और दालों को नुकसान पहुंचा है।
गुजरात में एक जून से अब तक 86 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। महाराष्ट्र में 46 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जबकि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में क्रमश: 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।
महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ में 30 जून तक, क्रमशः 30 प्रतिशत, 54 प्रतिशत और 27 प्रतिशत बारिश की कमी थी।
पलावत ने कहा, ‘‘मध्य भारत में जुलाई में बंगाल की खाड़ी में एक के बाद एक कम दबाव वाले क्षेत्रों के उत्पन्न होने के कारण अधिक वर्षा हुई, जिसने मानसून को असामान्य रूप से लंबी अवधि के लिए उत्तर की ओर नहीं बढ़ने दिया। इससे उत्तर भारत शुष्क बना रहा।’’
उन्होंने कहा कि ओडिशा और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गुजरात में बारिश की तीव्रता आने वाले दिनों में कम होने का अनुमान है क्योंकि मॉनसून उत्तर भारत की ओर बढ़ रही है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने कहा, ‘‘हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर में 18 जुलाई से अगले पांच दिनों तक बारिश बढ़ेगी।’’
पंजाब किसान आयोग के पूर्व अध्यक्ष अजय वीर झाखड़ ने कहा कि खरीफ की बुवाई में देरी चिंताजनक है लेकिन अभी स्थिति गंभीर नहीं है।
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