देश की खबरें | गैर संहिताबद्ध मुस्लिम पर्सनल लॉ ने महिलाओं के लिए चुनौती पैदा की है : एनसीडब्ल्यू

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नयी दिल्ली, 15 जुलाई राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने शनिवार को एक चर्चा के दौरान कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ की गैर संहिताबद्ध प्रकृति की वजह से उसकी गलत व्याख्या होती है और यह मुस्लिम महिलाओं के समक्ष उल्लेखनीय चुनौती पेश करता है।

एनसीडब्ल्यू ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा आयोजित की थी जो खासतौर पर मुस्लिम पर्सनल लॉ की समीक्षा पर केंद्रित थी।

विचार विमर्श की यह प्रक्रिया विधि आयोग द्वारा विभिन्न संगठनों और लोगों से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर विचार आमंत्रित करने की पृष्ठभूमि में हुई।

एनसीडब्ल्यू ने मुस्लिम पर्सनल लॉ की गैर-संहिताबद्ध प्रकृति के नकारात्मक प्रभाव पर प्रकाश डाला, जिसी वजह से उनकी गलत व्याख्या हुई और मुस्लिम महिलाओं के लिए चुनौतियां पैदा हुईं।

एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने एक बयान में संहिताबद्ध कानूनों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या जो कानून हिंदू, ईसाई, सिख और बौद्ध महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहा है, क्या उसे केवल मुस्लिम महिलाओं के लिए माना जा सकता है?

बयान में कहा गया है कि संहिताबद्ध कानूनों की आवश्यकता है, साथ ही एक ऐसे कानूनी प्रारूप की दिशा में काम करने की जरूरत है जिसमें सभी के लिए समान अधिकारों की गारंटी हो, भले ही वे किसी भी धर्म से संबंध रखते हों।

एनसीडब्ल्यू ने कहा, ‘‘चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि समान नागरिक संहिता की अनुपस्थिति ने हमारे विविधता युक्त देश में असमानताओं और विसंगतियों को कायम रखा है, जिससे सामाजिक सद्भाव, आर्थिक विकास और लैंगिक न्याय की दिशा में प्रगति बाधित हुई है।’’

विचार-विमर्श के दौरान भारत के अटॉर्नी जनरल, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, उच्च न्यायालयों के प्रतिनिधि, विधि विश्वविद्यालयों के कुलपति, कानूनी दिग्गज और नागरिक समाज संगठनों सहित प्रमुख हितधारक मौजूद रहे।

विचार-विमर्श के दौरान, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने विवाह संस्था में सुधार और मजबूती की आवश्यकता पर जोर दिया।

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