विदेश की खबरें | संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा की रिहाई की मांग की
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संयुक्त राष्ट्र/जिनेवा, 21 अगस्त संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जी एन साईबाबा की हिरासत को सोमवार को "शर्मनाक" बताते हुए उन्हें जेल से रिहा किए जाने की मांग की।
साईबाबा को 2014 में गिरफ्तार किया गया था और माओवादियों से संबंध रखने के मामले में उन्हें 2017 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
मानवाधिकार संबंधी संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत मैरी लॉलर ने कहा कि साईबाबा को लगातार हिरासत में रखा जाना "शर्मनाक" है।
लॉलर ने एक बयान में कहा, "यह विरोधी स्वर को चुप कराने की कोशिश करने वाले देश के लक्षणों को दर्शाता है।"
उन्होंने कहा कि साईबाबा "लंबे समय से" भारत में अनुसूचित जाति और आदिवासी लोगों सहित अल्पसंख्यकों के अधिकारों के रक्षक रहे हैं।
बयान में कहा गया है कि साईबाबा पांच साल की उम्र से रीढ़ की हड्डी की बीमारी और पोलियो से पीड़ित हैं और वह व्हीलचेयर का इस्तेमाल करते हैं।
बयान के अनुसार कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बार-बार उनके अभियोजन पर गंभीर चिंता जताई है और संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह ने 2021 में उनकी हिरासत को मनमाना बताया था। इसमें कहा गया है कि हिरासत के दौरान साईबाबा की तबीयत काफी खराब हो गई है, इसलिए उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।
भारत ने पहले कहा था कि देश में प्राधिकारी कानून के उल्लंघन के मामले में स्थापित न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुसार सख्त कार्रवाई करते हैं।
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