विदेश की खबरें | एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट पर विवाद के बाद यूक्रेन इकाई की प्रमुख का इस्तीफा
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

फेसबुक पर शुक्रवार रात एक बयान में पोकालचुक ने आरोप लगाया कि एमनेस्टी यूक्रेन में युद्ध की हकीकत से वाकिफ नहीं है और उसे स्थानीय कर्मचारियों की चिंताओं पर फिर से गौर करना चाहिए।

यूक्रेन के शीर्ष अधिकारियों और पश्चिमी देशों के राजनयिकों ने बृहस्पतिवार को जारी की गई रिपोर्ट की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि इसके लेखकों ने यूक्रेन की सेना की जवाबी कार्रवाई की तुलना रूस के हमलावर सैनिकों की कार्रवाई से कर भीषण गलती की।

पोकालचुक ने कहा, ‘‘यह स्वीकार करना दुखद है, लेकिन मैं और एमनेस्टी इंटरनेशनल का नेतृत्व मूल्यों को लेकर बंटा हुआ है। मेरा मानना ​​है कि समाज की भलाई के लिए किए गए किसी भी कार्य में स्थानीय संदर्भ को ध्यान में रखना चाहिए और परिणामों के बारे में सोचना चाहिए।’’

रूस ने बार-बार यह आरोप लगाते हुए नागरिक क्षेत्रों पर हमलों को उचित ठहराया है कि यूक्रेन के सैनिक आबादी वाले इलाके से मोर्चा संभाले हुए हैं।

पोकालचुक ने कहा कि उनके कार्यालय ने एमनेस्टी के नेतृत्व से यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट के तथ्यों पर जवाब देने के लिए समुचित समय देने का आग्रह किया है और ऐसा नहीं होने पर रूस दुष्प्रचार में कामयाब हो सकता है।

रिपोर्ट के प्रकाशन पर एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेश कालमार्ड ने कहा है कि संस्था को कई ऐसे प्रमाण मिले हैं जिसमें पाया गया कि यूक्रेन के सैनिकों ने आबादी वाले इलाकों में तैनाती से नागरिकों की जान को खतरे में डाला और युद्ध के नियमों का उल्लंघन किया।

कालमार्ड ने शुक्रवार को एक ट्वीट में संस्था के कार्य का बचाव किया।

यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कालमार्ड के ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि एमनेस्टी ‘फर्जी निष्पक्षता’ का दावा करती है और वह रूस के हाथों की ‘कठपुतली’ है।

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