रूस के पश्चिमी हिस्से में स्थित एक हवाई अड्डे पर एक दिन पहले हुए हमले के संदर्भ में जेलेंस्की का यह बयान आया है।
जेलेंस्की ने अपने टेलीग्राम चैनल पर बताया कि इस हथियार का निर्माण यूक्रेन के सामरिक उद्योग मंत्रालय ने किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इसके अलावा इस बारे में कोई अन्य विवरण नहीं दिया।
स्थानीय खबरों के अनुसार, मास्को ने बुधवार को दावा किया था कि रूस में चार घंटे तक ड्रोन मंडराते नजर आये थे, जिनसे एस्टोनिया और लातविया के साथ लगने वाली रूस की सीमा के निकट स्थित एक हवाई अड्डे पर हमला किया गया। खबरों में कहा गया है कि इस हमले में चार आईएल-76 सैन्य परिवहन विमान क्षतिग्रस्त हो गए।
यह हवाई अड्डा रूस के पसकोव क्षेत्र में है, जो यूक्रेन की सीमा से करीब 700 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।
कुल मिलाकर, 18 महीने के युद्ध के दौरान छह रूसी क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है।
हालांकि, अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि ये ड्रोन यूक्रेन से भेजे गये थे या रूस के अंदर ही छोड़े गये थे।
यूक्रेन के अधिकारी आम तौर पर रूसी क्षेत्र में हमलों के लिए न तो जिम्मेदारी लेते हैं और न ही इनसे इनकार करते हैं। हालांकि यूक्रेन के अधिकारी कभी-कभी परोक्ष रूप से इनका उल्लेख करते हैं। जेलेंस्की का बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि रूस में हुए इस हमले के पीछे यूक्रेन ही है।
रूस के परिवहन अधिकारियों के अनुसार हमलों के बाद पसकोव हवाई अड्डे को बंद करना पड़ा। हालांकि, बृहस्पतिवार को इसे पुन: खोल दिया गया।
अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि मास्को के निकट एक अन्य ड्रोन को पकड़ लिया गया जिसके परिणामस्वरूप रूसी राजधानी में कई हवाई अड्डों पर विभिन्न विमानों के परिचालन में देरी हुई। इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इस बीच, रूसी समाचार एजेंसी ‘इंटरफैक्स’ ने अपनी खबरों में कहा है रूसी सेना ने बुधवार को ब्रयांस्क सीमा क्षेत्र में दो लोगों को मार गिराया और यूक्रेन के एक हमलावर समूह के पांच सदस्यों को हिरासत में ले लिया।
यह स्पष्ट है कि यूक्रेन के ड्रोनों का रूस के अंदर तक पहुंचना और सीमापार हमला कर तोड़फोड़ करने का अभियान सैन्य और राजनीतिक रूप से रूस पर दबाव बनाने के उसके प्रयासों का हिस्सा है।
इस बीच, यूक्रेन के अधिकारियों ने दावा किया कि जून में शुरू किया गया यूक्रेनी जवाबी हमला अग्रिम पंक्ति के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा रहा है।
यूक्रेन के थिंक टैंक ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज’ (आईआईएसएस) ने एक आकलन में कहा कि देश का लक्ष्य रूस का मनोबल गिराना और उसके कमांडरों पर दबाव बढ़ाना है।
आईआईएसएस ने बुधवार देर रात अपने विश्लेषण में कहा कि रणनीति रूसी सेनाओं को उस चरम बिंदु पर लाने की है जहां से युद्ध शक्ति और मनोबल टूटना शुरू हो सकता है।
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