देश की खबरें | गलवान घाटी में शहीद हुए दो सैनिकों का ओडिशा में अंतिम संस्कार
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भुवनेश्वर, 19 जून लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में शहीद हुए ओडिशा के दो सैनिकों का शुक्रवार को उनके पैतृक गांवों में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।
नायब सूबेदार नंदूराम सोरेन (43) का मयूरभंज जिले के चंपौडा गांव में संथाली परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।
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वहीं, सिपाही चंद्रकांत प्रधान (28) का अंतिम संस्कार कंधमाल जिले के बीयरिपांगा गांव में ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया।
इन दोनों सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। दोनों शहीदों को सेना के जवानों ने सलामी दी।
सोरेन की शवयात्रा रायरंगपुर नगर से शुरू हुई और सात किलोमीटर दूर चंपौडा अंतिम संस्कार स्थल पर जाकर संपन्न हुई। इस दौरान हजारों लोग ‘नंदूराम सोरेन अमर रहे’ तथा ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे।
उनके भतीजे कान्हू सोरेन ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। इस अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री सुदाम मरांडी, लोकसभा सांसद विश्वेश्वर टुडु, राज्यसभा सदस्य ममता महंत और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
सोरेन के परिवार में उनकी पत्नी लक्ष्मी सोरेन तथा तीन बेटियां हैं। वह सेना की 16 बिहार रेजीमेंट में 1997 में शामिल हुए थे।
सिपाही प्रधान के अंतिम संस्कार में भी इसी तरह के दृश्य दिखे।
बेल्लीगुडा के उप-कलेक्टर देवेंद्र कुमार नंदा ने कहा कि इस दौरान रायकिया से बीयरिपांगा तक एक मोटरसाइकिल जुलूस निकाला गया और लोगों ने ‘शहीद चंद्रकांत अमर रहें’ के नारे लगाए।
प्रधान के पार्थिव शरीर को उनके घर से 200 मीटर दूर ईसाई परंपरा के अनुसार दफना दिया गया।
वह अविवाहित थे और मार्च 2014 में बिहार रेजीमेंट में शामिल हुए थे।
उनके परिवार में उनके पिता करुणाकर प्रधान, मां बिलासिनी प्रधान, बड़ी बहन और दो छोटे भाई हैं।
शहीद सैनिकों के पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार की शाम भुवनेश्वर लाये जहां राज्यपाल गणेशीलाल और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।
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