देश की खबरें | सुरंग हादसा: ऑगर मशीन के हिस्से बाहर निकाले गए, लंबवत ड्रिलिंग 36 मीटर तक पहुंची
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उत्तरकाशी, 27 नवंबर उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे बचाव अभियान के 16वें दिन सोमवार को मलबे में फंसी अमेरिकी ऑगर मशीन के हिस्से बाहर निकाल लिए गए हैं जबकि सुरंग के ऊपर से की जा रही लंबवत ड्रिलिंग 36 मीटर तक पहुंच गयी है।
बचाव कार्यों में सहयोग के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से नियुक्त नोडल अधिकारी नीरज खैरवाल ने सिलक्यारा में मीडिया को बताया कि तड़के तक मलबे के अंदर फंसी ऑगर मशीन के हिस्सों को काटकर निकाल दिया गया।
उन्होंने कहा कि ऑगर मशीन का हेड (सिरा) भी पाइप के अंदर फंसा हुआ था और अब उसे भी हटा दिया गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मशीन के ‘हेड’ को निकालने के लिए कुल 1.9 मीटर पाइप को भी काटना पड़ा ।
खैरवाल ने बताया कि उसके बाद सुरंग के मलबे के अंदर बारी-बारी से 220 मिमी, 500 मिमी और 200 मिमी लंबी यानी कुल 0.9 मीटर लंबी पाइप डाली गई।
खैरवाल ने कहा कि ऑगर मशीन के हिस्से निकालने के बाद हाथ से काम शुरू हो गया है, लेकिन इसके पूरा होने की समयसीमा नहीं बतायी जा सकती। उन्होंने कहा कि भगवान से प्रार्थना है कि कठिनाइयां न आएं ताकि जल्द से जल्द श्रमिकों तक पहुंचा जा सके।
उन्होंने कहा कि 'रैट माइनिंग' तकनीक से हाथ से मलबा साफ किया जाएगा, लेकिन अगर कहीं सरिया या गर्डर या अन्य प्रकार की मुश्किलें आयीं तो मशीन से उसे काटा जाएगा और फिर मशीन से पाइपों को अंदर डाला जाएगा।
सुरंग बना रही राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद ने कहा कि मलबे में 0.9 मीटर लंबी पाइप डाली जा चुकी है जबकि एक मीटर पाइप और डालकर पहले वाली लंबाई प्राप्त करनी होगी।
उन्होंने कहा कि इसके बाद मलबे में छह मीटर लंबी पाइप डालना कठिन और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसकी नियमित समीक्षा की जा रही है और सभी प्रकार के जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द मलबे को पार किया जा सके।
सुरंग के सिलक्यारा छोर से श्रमिकों तक पहुंचने के लिए रास्ता बनाने के लिए 25 टन वजनी ऑगर मशीन से की जा रही क्षैतिज ड्रिलिंग में शुक्रवार शाम को तब अवरोध आ गया था जब उसके हिस्से मलबे में फंस गए थे। ड्रिलिंग रुकने के समय श्रमिकों तक पहुंचने के लिए 10-12 मीटर तक एकत्र मलबे को भेदा जाना शेष था।
क्षैतिज ड्रिलिंग में आए व्यवधान के बाद रविवार को बचाव दलों ने वैकल्पिक रास्ता बनाने के लिए सुरंग के ऊपर से लंबवत ड्रिलिंग शुरू की जो 36 मीटर तक पहुंच गयी।
अहमद ने बताया कि सतलुज जलविद्युत निगम द्वारा सुरंग के शीर्ष से की जा रही लंबवत ड्रिलिंग का काम बहुत अच्छे से चल रहा है और अब तक 36 मीटर ड्रिलिंग हो चुकी है। उन्होंने बताया कि श्रमिकों तक पहुंचने के लिए कुल 86 मीटर तक ड्रिलिंग की जानी है जिसमें से 50 मीटर तक ड्रिलिंग करना शेष है।
एक अधिकारी ने बताया कि इसके तहत 1.2 मीटर व्यास के पाइपों को लंबवत तरीके से सुरंग के शीर्ष से नीचे की ओर डाला जाएगा।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख सचिव डॉ. पीके मिश्र ने सोमवार को सिलक्यारा पहुंचकर पिछले दो सप्ताह से फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे बचाव कार्यों का जायजा लिया।
उन्होंने सुरंग के अंदर चल रहे बचाव कार्य की बारीकियों को समझा और अधिकारियों के साथ ही इस काम में जुटे इंजीनियर और श्रमिकों से बात करके उनका हौसला बढ़ाया।
मिश्र ने अधिकारियों को अंदर फंसे श्रमिकों के साथ राहत बचाव कार्य में जुटे सभी लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।
श्रमिकों से बातचीत में उन्होंने उनसे अपना ध्यान रखने के लिए कहा तथा उन्हें बताया कि बचाव अभियान में सभी लोग मेहनत कर रहे हैं और कई मोर्चों पर कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि सभी को जल्द बाहर निकालने की कोशिश जारी है।
मिश्र ने फंसे श्रमिकों के परिजनों से भी मुलाकात करके उनका हौसला बढ़ाया और कहा कि पूरा देश श्रमिकों की शीघ्र और सुरक्षित निकासी के लिए दुआ कर रहा है।
उन्होंने कहा कि परिजनों को हौसला बनाए रखना होगा और सरकार उनके साथ खड़ी है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रही सिलक्यारा सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था जिसके कारण उसमें काम कर रहे 41 श्रमिक फंस गए थे। उन्हें बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Nov 27, 2023 08:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

