देश की खबरें | तृणमूल कांग्रेस ने गैर शिक्षण कर्मचारियों के लिए राहत योजना पर रोक के बाद विपक्ष की आलोचना की

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कोलकाता, 20 जून तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को दोहराया कि वह न्यायपालिका का सम्मान करती है, लेकिन उसने हजारों गैर-शिक्षण कर्मचारियों को कथित रूप से ‘‘मानवीय राहत देने से इनकार’’ करने के लिए विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की और इस कदम को अमानवीय बताया।

इन गैर शिक्षण कर्मचारियों को उच्चतम न्यायालय द्वारा 2016 की भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के बाद अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है।

तृणमूल ने ये टिप्पणियां कलकत्ता उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद की हैं। उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के बाद नौकरी गंवाने वाले गैर शिक्षण स्कूली कर्मचारियों को आर्थिक सहायता देने की पश्चिम बंगाल सरकार की योजना के क्रियान्वयन पर 26 सितंबर तक रोक लगा दी है।

अदालत ने इस योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर नौ जून को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस याचिका में राज्य द्वारा ‘ग्रुप सी’ के उन कर्मचारियों को 25,000 रुपये और ‘ग्रुप डी’ के उन कर्मचारियों को 20,000 रुपये दिए जाने का विरोध किया गया था जिनकी शीर्ष अदालत के आदेश के बाद नौकरी चली गई है।

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ताओं की दलीलों के विरोध में चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने और उसके बाद दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं को जवाब देने का निर्देश दिया।

अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता कुनाल घोष ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक तत्व अपनी आजीविका खोने वाले लोगों की दुदर्शा में भी खुशी ढूंढ रहे हैं।

घोष ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद 26,000 से अधिक लोगों ने अपनी नौकरियां गंवा दी जिससे कुछ लोग दूसरे के दुख से खुश हो रहे हैं। हमारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दयालु हैं जो प्रभावित लोगों के साथ खड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर की गयी है और साथ ही न्यायालय के फैसले के अनुरूप एक नयी भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की गयी है।

तृणमूल नेता ने इस योजना की कानूनी चुनौतियों का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने वाले विपक्षी नेताओं पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, ‘‘हम कानूनी रास्ता अपनाएंगे, लेकिन हम यह भी पता लगाएंगे कि कौन अदालत जाकर ये अमानवीय आदेश प्राप्त करता है।’’

पश्चिम बंगाल सरकार ने ‘ग्रुप सी’ और ‘ग्रुप डी’ श्रेणियों के उन गैर-शिक्षण कर्मचारियों के संकटग्रस्त परिवारों को अस्थायी तौर पर ‘‘मानवीय आधार पर सीमित आजीविका, सहायता और सामाजिक सुरक्षा’’ प्रदान करने के लिए हाल में एक योजना शुरू की थी, जिन्हें पश्चिम बंगाल एसएससी द्वारा आयोजित 2016 की चयन प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती किया गया था।

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सहायता प्राप्त स्कूलों के लगभग 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के बाद अपनी नौकरी खोनी पड़ी जिसमें 2016 की चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं पाई गई थीं।

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