देश की खबरें | शहरी आबादी को काफी कुछ सिखा सकते हैं आदिवासी: नायडू

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नयी दिल्ली, एक फरवरी उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने सोमवार को ‘‘शहरी मुख्यधारा’’ के उन लोगों के इस रुख से असहमति जतायी कि उन्हें आदिवासियों को सिखाना है ताकि विकसित होने में उनकी मदद की जा सके।

नायडू ने कहा कि वे आदिवासी हैं जिनके पास शहरी आबादी को सिखाने के लिए बहुत कुछ है। उन्होंने विकास के ऐसे मॉडल का आह्वान किया जो उनकी विशेष पहचान को संरक्षित करे।

उन्होंने कहा, ‘‘उनकी संस्कृति उनकी पहचान है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासियों को मुख्यधारा में शामिल करने के दौरान इस संस्कृति को बरकरार रखने की जरूरत है।

उपराष्ट्रपति ने यहां दिल्ली हाट में राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव ‘आदि महोत्सव' के उद्घाटन के बाद कहा कि आदिवासी संस्कृति का कोई भी नुकसान मानव जाति के लिए एक अपूरणीय क्षति होगी।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार उन्होंने कहा कि आदिवासी विकास के क्षेत्र में अद्वितीय चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का 'आदिवासियों' के प्रति विशेष ध्यान रहा है ।

नायडू ने शहरी मुख्यधारा के इस रवैये से असहमति जतायी जिसमें अक्सर यह माना जाता है कि जनजातियों को विकसित करने में मदद करने के लिए उन्हें बहुत कुछ सिखाना होगा।

नायडू ने कहा, ‘‘हम आम तौर पर यह भूल जाते हैं, वह वास्तव में आदिवासी हैं जिनसे शहरी आबादी को काफी कुछ सिखना है।’’

नायडू ने कहा कि आदिवासियों के जीवन का तरीका व्यावहारिक सत्य, शाश्वत मूल्यों और प्राकृतिक सादगी से निर्देशित होता है।

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