विदेश की खबरें | कोविड को फ्लू की तरह नहीं, नोरोवायरस की तरह मानें

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. ब्राइटन (ब्रिटेन), नौ जुलाई (द कन्वरसेशन) कोविड-19 के लक्षण मसलन बुखार, खांसी, दर्द, ये फ्लू के समान होते हैं इसलिए इन दोनों रोगों की तुलना की जाने लगी है। ब्रिटेन के नए स्वास्थ्य मंत्री साजिद जाविद ने हाल में कहा था, ‘‘हमें कोविड के आस्तित्व को स्वीकार करना सीखना होगा और इससे निबटने के तरीके खोजने होंगे - उसी तरह जिस तरह हम फ्लू से निबटते हैं।’’

ब्राइटन (ब्रिटेन), नौ जुलाई (द कन्वरसेशन) कोविड-19 के लक्षण मसलन बुखार, खांसी, दर्द, ये फ्लू के समान होते हैं इसलिए इन दोनों रोगों की तुलना की जाने लगी है। ब्रिटेन के नए स्वास्थ्य मंत्री साजिद जाविद ने हाल में कहा था, ‘‘हमें कोविड के आस्तित्व को स्वीकार करना सीखना होगा और इससे निबटने के तरीके खोजने होंगे - उसी तरह जिस तरह हम फ्लू से निबटते हैं।’’

क्या हमने कोविड-19 की तुलना करने के लिए गलत रोग को चुना है? हम यह मानते हैं कि मौसमी फ्लू एक ऐसा संक्रमण है जिसकी चपेट में हर कोई आ जाता है। इसके खिलाफ हम केवल उन लोगों का टीकाकरण करते हैं जिन्हें जटिलताएं हो सकती हैं और उन लोगों का उपचार करते हैं जिन्हें निमोनिया जैसे गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। अन्यथा बाकी लोग तो सामान्य रूप से काम करते रहते हैं। विश्वभर में प्रति वर्ष फ्लू से संबंधित रोगों के कारण करीब 4,00,000 लोगों की मौत होती है।

हमें कोविड के साथ जीने का कोई तरीका तो खोजना ही होगा लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इसे फ्लू समान मानने के लिए हमें अभी लंबा रास्ता तय करना होगा। 2020 की शुरुआत के बाद से दुनियाभर में कोरोना वायरस के 18 करोड़ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और कम से कम 40 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा हम कोविड के दीर्घकालिक वास्तविक प्रभाव से भी अवगत नहीं हैं जबकि इसके लंबे समय तक रहने वाले लक्षण समान हैं मसलन दस में से एक व्यक्ति स्वयं को संक्रमण के 12 हफ्ते बाद भी बीमार महसूस करता है। अभी तो कोविड का स्वास्थ्य प्रभाव फ्लू से कहीं अधिक है।

यह तो तय है कि कोविड-19 अधिक संक्रामक है। इस बात को तो हम निश्चित तौर पर कह सकते हैं क्योंकि बीते 18 महीनों में कोविड पर काबू पाने के प्रयासों के चलते फ्लू के मामले घटे हैं बल्कि शून्य के बराबर हैं लेकिन ये प्रयास कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में उतने प्रभावी नहीं रहे।

दक्षिणी गोलार्द्ध में 2020 के मध्य में, जाड़े के मौसम में फ्लू के मामले लगभग नहीं थे। यूरोप और उत्तर अमेरिका में नवंबर 2020 से मार्च 2021 के बीच फ्लू के मामले नहीं के बराबर थे। दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन जैसे देश, जहां कोरोना वायरस संक्रमण की दर अधिक थी, वहां भी फ्लू के शायद ही कोई मामले सामने आए हों। यह बताता है कि फ्लू से निबटने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल में आने वाले तरीकों का कोविड-19 पर अलग ही प्रभाव होता है। ऐसे में कोविड-19 को फ्लू की तरह मानने का नतीजा इसके अधिक मामले और अधिक लोगों की मौत होगा।

एक और तुलना

कोविड-19 के लिए जिम्मेदार सार्स-सीओवी-2 वायरस और इन्फ्लुएंजा वायरस में कुछ समानताएं हैं। इनके चलते हम इनके बीच तुलना करने को प्रेरित होते हैं। सार्स-सीओवी-2 से संक्रमित होने वाले करीब 20 फीसदी लोगों में इसके लक्षण नजर नहीं आते और फ्लू वायरस से संक्रमित होने वाले कई लोग बीमार नहीं पड़ते। दोनों ही वायरस स्वरूप बदलते रहते हैं। बुजुर्गों, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को दोनों ही वायरस से गंभीर रूप से बीमार पड़ने का खतरा अधिक होता है।

लेकिन यही सब विशेषताएं ‘नोरोवायरस’ में भी होती हैं। इससे पीड़ित लोगों में कई बार लक्षण नजर नहीं आते और यह वायरस भी तेजी से अपने स्वरूप बदलता है। एक ही अस्पताल में नोरोवायरस के विभिन्न स्वरूप पाए गए हैं। नोरोवायरस जब फैलता है तो यह कई बार इतनी बार और इतनी तेजी से स्वरूप बदलता है कि मानक जांच किट भी इसके हर स्वरूप का पता नहीं लगा पाते।

नोरोवायरस के कारण होने वाले लक्षणों में उल्टी, दस्त शामिल हैं। ऐसी स्थिति में यह धरातल की सतहों पर आ जाता है। इससे दूसरे भी संक्रमित हो जाते हैं। कोविड से पीड़ित कुछ लोगों को भी यही लक्षण होते हैं । अत: केवल फ्लू ही ऐसा वायरस रोग नहीं है जिससे कोविड की तुलना की जाए।

हमें आने वाले वर्षों में भी कोविड की लहरों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा और उनसे निबटने की योजना बनानी होगी। इसे जानते हुए हमें सार्स-सीओवी-2 को फ्लू की तरह नहीं बल्कि नोरोवायरस की तरह काबू में करना होगा। नोरोवायरस से पीड़ित लोगों को अन्य से पृथक कर दिया जाता है, उनका इलाज भी अलग रखकर किया जाता है। इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मी पीपीई किट पहनते हैं और सतहों की अच्छी तरह सफाई की जाती है। कोविड-19 से भविष्य में हमें इसी तरह निबटना होगा। अत: यह फ्लू नहीं बल्कि नोरोवायरस के साथ रहने के समान होगा।

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