देश की खबरें | पासपोर्ट के लिए ट्रांसजेंडर को लिंग पुनर्निर्धारण सर्जरी कराने को बाध्य नहीं किया जा सकता: अदालत

नयी दिल्ली, 11 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने के लिए लिंग पुनर्निर्धारण सर्जरी प्रमाणपत्र पेश करने का नियम प्रथम दृष्टया जीवन एवं निजी स्वतंत्रता के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन करता है।

अदालत ने कहा कि विभाग किसी को इस तरह की सर्जरी कराने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

उच्च न्यायालय ने कहा कि यह नियम प्रथम दृष्टया उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के दायरे में है, जिसके तहत ट्रांसजेंडर व्यक्ति को 'तीसरे लिंग' के तौर पर पहचान मिल सकती है।

अदालत ने केंद्र की ओर से पेश वकील को इस संबंध में निर्देश लेने के वास्ते एक सप्ताह का समय दिया और मामले की सुनवाई 22 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने कहा, ''आपको अपना नियम बदलना चाहिए। आप ये कहने वाले कौन होते हैं कि सर्जरी का प्रमाणपत्र पेश करो। यह (संविधान के) अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। एक सप्ताह में हमें जवाब दीजिए और अपने मुवक्किल को सुझाव दीजिए कि इस नियम में लचीलापन लाएं।''

अदालत ने कहा, ''आप इस (पासपोर्ट) उद्देश्य के लिए किसी पर लिंग पुनर्निर्धारण सर्जरी कराने का जोर नहीं डाल सकते।''

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