नयी दिल्ली, 28 नवंबर सरकार ने नियामकों और जांच एजेंसियों को निर्देश दिया है कि आतंकवाद और आतंकी वित्तपोषण से तार जुड़े होने के मामले में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा नामित निकायों के खिलाफ वित्तीय पाबंदियां बिना देरी के और यूएपीए कानून के तहत 24 घंटे के अंदर लागू होनी चाहिए।
देश के अर्थतंत्र में धनशोधन और काले धन का पता लगाने के लिए काम करने वाली वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) को ‘सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधिविरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) अधिनियम, 2005’ (डब्ल्यूएमडी) की धारा 12ए के तहत ऐसे निकायों की पहचान करने, अधिसूचित करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, भारत ने संयुक्त राष्ट्र (सुरक्षा परिषद) अधिनियम, 1947 की धारा 2 के तहत अनिवार्य यूएनएससी संकल्प 1718 (2006) और 2231 (2015) और उनके बाद के संकल्पों के तहत देश के विशिष्ट प्रयासों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुसार कानून बनाया था।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग (डीओआर) ने देश की नियामक, अन्वेषण, खुफिया जानकारी एकत्र करने वाली एजेंसियों और राज्य की पुलिस एजेंसियों को पिछले महीने निर्देश जारी कर 2005 के कानून को लागू करने की प्रक्रिया विस्तार से बताई थी जिसका मकसद सामूहिक विनाश के हथियारों का प्रसार रोकना है।
इसमें किसी भी जैविक, रासायनिक या परमाणु हथियार की बात शामिल है। कानून भारत की इस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है कि सरकार से इतर किसी तत्व और किसी भी आतंकवादी को सामूहिक विनाश के शस्त्र हासिल करने से रोकना है।
पीटीआई को उपलब्ध हुए डीओआर के संवाद के अनुसार, सरकार द्वारा विधिविरुद्ध क्रियाकलाप रोकथाम अधिनियम, 1967 (यूएपीए) की धारा 51ए और डब्ल्यूएमडी अधिनियम की धारा 12ए के तहत आदेश जारी किए गए हैं।
इसमें कहा गया है, ‘‘पाबंदियां प्रभावी हों और नामित लोग या निकाय लक्षित धन और संपत्तियों का लेन-देन या उपयोग नहीं कर पाएं, इसके लिए यह बात महत्वपूर्ण है कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समझौतों की तरह ही, बिना देरी के प्रतिबंध लागू किये जाएं।’’
कार्यालयीन ज्ञापन के रूप में जारी दिशानिर्देश भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा), कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, आसूचना ब्यूरो (आईबी), राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए), सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों के साथ ही इस क्षेत्र की अन्य एजेंसियों को भेजा गया है।
केंद्र सरकार ने इस साल की शुरुआत में एआईयू निदेशक को डब्ल्यूएमडी कानून की धारा 12ए के तहत केंद्रीय नोडल अधिकारी (सीएनओ) नियुक्त किया था।
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