देश की खबरें | शोधित जल का उपयोग बढ़ाने के लिए गंगा नदी तट पर स्थित संयंत्रों, उद्योगों का सर्वेक्षण करायेगी सरकार
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नयी दिल्ली, 17 मई गंगा नदी के तट पर स्थित बिजली संयंत्रों द्वारा शोधित जल के उपयोग की धीमी गति को देखते हुए सरकार इस नदी तट के 10 किलोमीटर के दायरे में अधिक जल की खपत करने वाले बिजली संयंत्रों, तेल शोधक कारखानों, कागज, कपड़ा उद्योगों आदि का सर्वेक्षण करायेगी।
गंगा नदी पर अधिकार सम्पन्न कार्यबल (ईटीएफ) की पिछले महीने हुई 11वीं बैठक के कार्यवृत (मिनट्स) दस्तावेज से यह जानकारी मिली है।
बैठक के कार्यवृत के अनुसार जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इसमें कहा कि विद्युत संयंत्रों द्वारा शोधित जल के उपयोग की रफ्तार धीमी है ऐसे में प्रक्रियाओं को तेज करने तथा जरूरी मंजूरी प्रदान करने को लेकर जल्द कदम उठाये जाएं।
उन्होंने निर्देश दिया कि गंगा नदी के तट पर स्थित सभी विद्युत संयंत्रों को शोधित जल का उपयोग करने को कहा जाए तथा जल संसाधन सचिव एवं विद्युत सचिव की अध्यक्षता में मासिक समीक्षा बैठक की जाए।
मंत्री ने गंगा नदी के तट के 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित कागज एवं लुगदी उद्योग, बिजली संयंत्रों, तेल शोधक कारखानों, कपड़ा उद्योगों जैसे अधिक जल की खपत करने वाले उद्योगों का सर्वेक्षण कराने को भी कहा।
सर्वेक्षण में इन उद्योगों द्वारा उपयोग में लाये जाने वाले भूजल या सतह जल के रूप में ताजे जल के स्रोत के स्थान का पता लगाने तथा इन उद्योगों को ताजे जल पर निर्भरता कम करने के निर्देश देने को भी कहा गया है।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को इससे जुड़ी पहलों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है।
गंगा नदी के तट पर स्थित उद्योगों या संयंत्रों द्वारा शोधित जल के उपयोग की पहल को लेकर बिजली मंत्रालय ने बताया कि दिल्ली में दो गैस आधारित विद्युत संयंत्र (प्रगति पी पी) अभी शोधित जल का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही इस नदी के तट पर स्थित 26 बिजली संयंत्रों की अब तक पहचान की गई है जो जलमल संवर्द्धन संयंत्रों (एसटीपी) के माध्यम से शोधित जल का उपयोग कर सकते हैं।
यह भी सूचित किया गया कि शोधित जल के उपयोग करने को लेकर पानीपत तल शोधक संयंत्र की पहचान की गई है।
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