देश की खबरें | टीएमसी समर्थक शिक्षाविदों के मंच ने राजभवन में लंबित विधेयकों को लेकर न्यायालय की टिप्पणी को सराहा
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कोलकाता, 24 नवंबर शिक्षाविदों के एक मंच ने उच्चतम न्यायालय के उस फैसले की शुक्रवार को सराहना की कि राज्यपाल बिना किसी कार्रवाई के विधेयकों को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते।
उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि राज्यपाल बिना कार्रवाई के अनिश्चितकाल के लिए विधेयकों को लंबित नहीं रख सकते। न्यायालय ने साथ ही कहा कि राज्य के गैर निर्वाचित प्रमुख के तौर पर राज्यपाल संवैधानिक शक्तियों से संपन्न होते हैं लेकिन वह उनका इस्तेमाल राज्यों के विधानमंडल द्वारा कानून बनाने की सामान्य प्रक्रिया को विफल करने के लिए नहीं कर सकते।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) समर्थक मंच ‘एजुकेशनिस्ट फोरम’ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी और निर्देश पश्चिम बंगाल सहित सभी राज्यों पर लागू होते हैं।
राज्य विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपतियों और वरिष्ठ प्रोफेसरों के एक मंच ‘एजुकेशनिस्ट फोरम’ ने एक बयान में कहा, ‘‘पंजाब में विधानसभा द्वारा पारित और राज्यपाल के पास लंबित विधेयकों को लेकर माननीय उच्चतम न्यायालय का निर्णय स्पष्ट रूप से पश्चिम बंगाल पर भी लागू होता है। इसलिए, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुरूप कानूनी कार्रवाई पश्चिम बंगाल के राज्यपाल द्वारा तुरंत की जानी चाहिए।’’
मंच ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल सरकार को उनके पास लंबित विभिन्न विधेयकों पर राज्यपाल से बात करनी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो पश्चिम बंगाल के लोगों की इच्छा के अनुरूप विधानसभा का सत्र बुलाना चाहिए।’’
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई संवैधानिक लोकतंत्र के उन बुनियादी सिद्धांतों के विपरीत होगी जो शासन के संसदीय स्वरूप पर आधारित हैं।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अगर राज्यपाल किसी विधेयक को मंजूरी देने से रोकने का निर्णय लेते हैं तो उन्हें विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानमंडल के पास वापस भेजना होता है।
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