नयी दिल्ली, तीन अगस्त कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण विधेयक को धन विधेयक के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उनके इस दावे को केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खारिज कर दिया।
तिवारी ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि इस विधेयक को धन विधेयक की तरह लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसे फिर से संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा जाना चाहिए।
वैष्णव ने सदन में इस विधेयक को पेश किये जाते समय इस आरोप को खारिज कर दिया और कहा यह ‘धन विधेयक’ नहीं है, यह सामान्य विधेयक है।
इस विधेयक का उद्देश्य इंटरनेट कंपनियों, मोबाइल ऐप और व्यावसायिक घरानों आदि को गोपनीयता के अधिकार के तहत नागरिकों के डाटा को इकट्ठा करने, उनका भंडारण करने और उसके इस्तेमाल को लेकर अधिक जवाबदेह बनाना है।
तिवारी ने इससे पहले सुबह ट्वीट किया, ‘‘डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण विधेयक को अचानक वित्तीय विधेयक के रूप में कैसे वर्गीकृत किया गया?’’
उनका कहना था, ‘‘इसे एक नियमित विधेयक माना जाना चाहिए और दोबारा जेपीसी के पास भेजा जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यदि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस विधेयक के पारित होने पर इसे धन विधेयक के रूप में प्रमाणित करते हैं, जो इसे वित्तीय विधेयक के रूप में वर्गीकृत करने का मकसद प्रतीत होता है, तो राज्यसभा इस पर मतदान नहीं कर सकती। वह लोकसभा में केवल गैर-बाध्यकारी बदलावों की सिफारिश कर सकती है।’’
पंजाब के आनंदपुर साहिब से सांसद तिवारी ने कहा कि यह कदम ‘‘ डाटा संरक्षण विधेयक को लेकर संसद की संयुक्त समिति द्वारा दो भाजपा सदस्यों पी पी चौधरी और मीनाक्षी लेखी के नेतृत्व में किए गए प्रयासों का मजाक उड़ाता है।’’
उच्चतम न्यायालय ने एक फैसला सुनाते हुए कहा था कि निजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, जिसके बाद डाटा संरक्षण विधेयक पर काम शुरू हुआ।
सरकार ने पिछले साल अगस्त में व्यक्तिगत डाटा संरक्षण विधेयक वापस ले लिया था, जिसे पहली बार 2019 के अंत में पेश किया गया था और उसने नवंबर 2022 में मसौदा विधेयक का एक नया संस्करण जारी किया था।
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