देश की खबरें | हक की लड़ाई के लिए हर चुनावी समर लड़ता है तीतर सिंह
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. करणपुर विधानसभा क्षेत्र के एक छोटे से गांव में रहने वाले और ‘मनरेगा’ में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले बुजुर्ग तीतर सिंह की चुनाव लड़ते लड़ते उम्र बीतने को है । पंच, सरपंच से लेकर लोकसभा तक उन्होंने हर चुनाव लड़ा है लेकिन ये अलग बात है कि जिन हकों की लड़ाई के लिए वह सत्तर के दशक में चुनाव मैदान में उतरे थे, वह उन्हें आज तक नहीं मिले ।
जयपुर, छह नवंबर करणपुर विधानसभा क्षेत्र के एक छोटे से गांव में रहने वाले और ‘मनरेगा’ में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले बुजुर्ग तीतर सिंह की चुनाव लड़ते लड़ते उम्र बीतने को है । पंच, सरपंच से लेकर लोकसभा तक उन्होंने हर चुनाव लड़ा है लेकिन ये अलग बात है कि जिन हकों की लड़ाई के लिए वह सत्तर के दशक में चुनाव मैदान में उतरे थे, वह उन्हें आज तक नहीं मिले ।
दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले तीतर सिंह लगभग बीस चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन हर बार संख्या बल से हारते रहे हैं । हार तय है तो चुनाव क्यों लड़ते हैं? यह पूछने पर तीतर सिंह ने बुलंद आवाज में कहा,‘‘क्यों न लड़ें। सरकार जमीन दे, सहूलियतें दें... साडी हक दी लड़ाई है ये चुनाव।’’
यह बुजुर्ग एक बार फिर उसी जज्बे, जोश और मिशन के साथ विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है। चुनाव लड़ना तीतर सिंह के लिए लोकप्रियता हासिल करने या रिकॉर्ड बनाने का जरिया नहीं है, बल्कि अपने हकों को हासिल करने का एक हथियार है जिसकी धार समय और उम्र बीतने के बावजूद कुंद नहीं पड़ी है।
राजस्थान के करणपुर विधानसभा क्षेत्र के एक छोटे से गांव ‘25 एफ’ में रहने वाले तीतर सिंह पर चुनाव लड़ने का जुनून सत्तर के दशक में तब सवार हुआ, जब वह जवान थे और उन जैसे अनेक लोग नहरी इलाकों में जमीन आवंटन से वंचित रह गए थे ।
उनकी मांग रही कि सरकार भूमिहीन और गरीब मजदूरों को जमीन आवंटित करे। इसी मांग और मंशा के साथ उन्होंने चुनाव लड़ना शुरू किया और फिर तो मानों उन्हें इसकी आदत हो गयी। एक के बाद, एक चुनाव लड़े। हालांकि व्यक्तिगत स्तर पर जमीन आवंटित करवाने की उनकी मांग अब भी पूरी नहीं हुई है और उनके बेटे भी दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।
तीतर सिंह ने बताया कि वह अब तक लोकसभा के दस, विधानसभा के दस, जिला परिषद डायरेक्टर के चार, सरपंची के चार व वार्ड मेंबरी के चार चुनाव लड़ चुके हैं। नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे के अनुसार, इस समय उनकी उम्र 78 साल है।
तीतर सिंह ने फोन पर पीटीआई- को बताया कि उनकी तीन बेटियां व दो बेटे हैं। दोहते पोतों तक की शादी हो चुकी है। उनके पास जमा पूंजी के नाम पर 2500 रुपए की नकदी है। बाकी न कोई जमीन, न जायदाद, न गाड़ी- घोड़े।
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