नयी दिल्ली, 10 फरवरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए बुधवार को कहा कि निजी क्षेत्र के खिलाफ अनुचित शब्दों का उपयोग करने का समय चला गया और यह संस्कृति अब अस्वीकार्य है ।
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए मोदी ने कहा कि देश का सामर्थ्य बढ़ाने में सभी का सामूहिक योगदान है और जब सभी देशवासियों का पसीना लगता है, तभी देश आगे बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया बदल गयी है, सभी को अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘ देश के लिए सार्वजनिक क्षेत्र जरूरी है तो निजी क्षेत्र का योगदान भी जरूरी है।’’
प्रधानमंत्री ने नौकरशाही का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘क्या सबकुछ बाबू ही करेंगे, वे देश के हैं तो नौजवान भी तो देश के हैं।’’
उन्होंने कहा कि कोई भी क्षेत्र ले लें- दूरसंचार, फार्मा हर जगह हम निजी क्षेत्र की भूमिका देखते हैं। यदि भारत मानवता की सेवा करने में सक्षम है, तो यह निजी क्षेत्र की भूमिका के कारण भी है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ आज देश मानवता के काम आ रहा है तो इसमें निजी क्षेत्र का भी बहुत बड़ा योगदान है।’’
उन्होंने कहा कि हमें देश के युवाओं का मनोबल बढ़ाने की जरुरत है, जो प्राइवेट सेक्टर में अच्छा काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के खिलाफ अनुचित शब्दों का उपयोग करने के लिए अतीत में कुछ लोगों को वोट मिला होगा, लेकिन वह समय अब चला गया है।
मोदी ने कहा कि निजी क्षेत्र को लेकर अपशब्द की संस्कृति अब स्वीकार्य नहीं है। हम अपने युवाओं का इस तरह अपमान नहीं कर सकते हैं।"
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को कांग्रेस एवं कुछ विपक्षी दलों द्वारा चुनिंदा कॉपोरेट घरानों पर टीका टिप्पणी करने संदर्भ में देखा जा रहा है ।
दीपक वैभव
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