स्वेच्छा से बालश्रमिकों को मुक्त करने वालों को तीन माह तक अभियोजन से माफी दी जाए: सत्यार्थी

उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि वह ऐसी असामान्य स्थिति में वैचारिक एवं भावानात्मक दुविधा के चलते ऐसा असामान्य अनुरोध कर रहे हैं।

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नयी दिल्ली, 24 अप्रैल नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लॉकडाउन के दौरान फैक्टरियों एवं अन्य कार्यस्थलों से स्वेच्छा से बालश्रमिकों को मुक्त कर देने वाले सभी नियोक्तयों को तीन महीने तक मुकदमे या अन्य दंडात्मक कार्रवाई से माफी देने की अपील की।

उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि वह ऐसी असामान्य स्थिति में वैचारिक एवं भावानात्मक दुविधा के चलते ऐसा असामान्य अनुरोध कर रहे हैं।

उन्होंने लिखा है, ‘‘मैं जो अनुभव कर रहा हूं, वह मैं कह रहा हूं। वे सभी हमारे बच्चे हैं और हमारे बच्चे बिल्कुल नहीं मरने चाहिए। हम बच्चों को बालश्रम एवं शोषण से बचाने में विफल रहे हैं, उन्हें भूख एवं निराशा से अवश्य बचाया जाना चाहिए। हर बच्चे का जीवन सभी चीजों से ऊपर है।’’

सत्यार्थी ने पत्र में कहा है, ‘‘ बाल नियोक्ताओं को तीन महीने के लिए माफी देने की अधिसूचना की मांग आखिरी उपाय है जिसके बारे में मैंने अपने जीवन में पहली बार सोचा होगा। असाधारण स्थिति असाधारण कदम की मांग करती है और मैं दृढ़तापूर्वक महसूस करता हूं कि देश में दासता एवं बालश्रम में फंसे लाखों बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए यह एक मात्र कदम बचा है।’’

उन्होंने अफसोस प्रकट करते हुए कहा कि पहले से ही इन बच्चों को पूर्ण पारश्रमिक नहीं दिया जाता है लेकिन अब उन्हें भोजन भी नहीं दिया जा रहा है एवं नियोक्ता अपने घरों की रक्षा के लिए भाग गये।

उन्होंने लिखा, ‘‘ जयपुर, हैदराबाद, मुम्बई, दिल्ली एवं अन्य शहरों में काम करने वाले इन बच्चों को विभिन्न राज्यों से तस्करी के माध्यम से ले जाया गया और उन्हें काम में धकेल दिया गया। अब, हमारे कार्यकर्ता भी लॉकडाउन के नियमों एवं विनियमों के चलते इन बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ’’

सरकार से लॉकडाउन के दौरान मुक्त किये गये इन बच्चों के लिए भोजन, सुरक्षा एवं उपचार की उचित व्यवस्था की सरकार से अपील करते हुए सत्यार्थी ने कहा कि यदि जरूरी हो तो स्थानीय एनजीओ की भी सहायता की जानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने अपने संगठन की ओर से भी सभी संभव सहायता की पेशकश की।

लॉकडाउन हटने पर इन बच्चों को शीघ्र सुरक्षित ढंग से उनके घरों पर भेजने की मांग करते हुए सत्यार्थी ने कहा कि कोविड-19 से उत्पन्न स्थिति के कुछ सामान्य होने पर बाल तस्करी में आकस्मिक वृद्धि का मुकाबला करने के लिए दृढ़ कार्ययोजना बने और उसे लागू करने के लिए अंतर मंत्रालीय कार्यबल गठित किया जाए।

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