देश की खबरें | शुभेंदु अधिकारी के करीबियों ने तृणमूल नेतृत्व से सुलह हो जाने के दावे को ‘गलत’ बताया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से बगावत करने वाले पार्टी के प्रमुख नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी लोगों ने पार्टी नेतृत्व से उनके सुलह होने के दावे को ‘गलत’ करार दिया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि अधिकारी की नाराजगी कायम है क्योंकि उनकी शिकायतों को दूर नहीं किया गया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

कोलकाता, दो दिसंबर राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से बगावत करने वाले पार्टी के प्रमुख नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी लोगों ने पार्टी नेतृत्व से उनके सुलह होने के दावे को ‘गलत’ करार दिया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि अधिकारी की नाराजगी कायम है क्योंकि उनकी शिकायतों को दूर नहीं किया गया है।

उन्होंने बताया कि अधिकारी भारी जनाधार वाले प्रभावशाली नेता हैं, जिन्होंने राज्य मंत्रिमंडल और अन्य पदों से इस्तीफा दे दिया था, जो कुछ दिन पहले तक उनके पास थे। करीबियों ने बताया कि अधिकारी इस बात पर कायम हैं कि उनके लिए पार्टी के साथ काम करना ‘मुश्किल’ है।

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ऐसा कहा जा रहा है कि जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि मंगलवार को पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी, सौगत रॉय और सुदीप बंदोपाध्याय के अलावा चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद सभी मतभेद दूर हो गए हैं, उससे अधिकारी नाराज हैं।

सूत्रों ने बताया कि अधिकारी पर्दे के पीछे हुई बैठक में क्या बात हुई, वह मीडिया में लीक नहीं करना चाहते हैं।

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तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि अधिकारी ने पार्टी नेतृत्व को संदेश दिया है, ‘‘ उनके लिए पार्टी के साथ मिलकर काम करना मुश्किल होगा क्योंकि नेताओं ने उनके द्वारा उठाई की समस्याओं का समाधान किए बिना और उन्हें बोलने का मौका दिए बिना मीडिया में झूठे दावे किए हैं।’’

बैठक के बाद से अधिकारी से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

अधिकारी की नाराजगी की जानकारी होने पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य सौगत रॉय ने कहा, ‘‘मैंने मंगलवार को जो भी कुछ कहा, वह बैठक में सामने आया सच था। अब अगर सुवेंदु ने अपना रुख बदल लिया है तो उन्हें स्पष्ट करना चाहिए। मुझे अब कुछ नहीं कहना है।’’

बागी नेता को मनाने के लिए नए सिरे से वार्ता करने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर रॉय का जवाब नकारात्मक रहा।

तृणमूल पार्टी के एक नेता ने पहचान गोपनीय रखते हुए कहा कि अधिकारी इस बात से नाराज हैं कि रॉय ने मंगलवार रात को जल्दबाजी करते हुए दावा कर दिया कि ‘‘ सभी मुद्दों का समाधान हो गया है’’ जबकि छह दिसंबर को संवाददाता सम्मेलन होना था।

अधिकारी के करीबी नेता ने कहा, ‘‘शुवेंदु दा ने बैठक के बाद अपना रुख बताने के लिए कुछ समय मांगा था लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने दूसरी ही तस्वीर पेश करने की कोशिश की। उन्हें यह पसंद नहीं आया और अब सबकुछ खत्म हो गया है।’’

पूर्व मंत्री को मंगलवार और बुधवार को बार-बार फोन कॉल किया गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

उधर, अधिकारी के अपनी नाखुशी सार्वजनिक करने के बाद तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य सौगत रॉय ने कहा, ‘‘मंगलवार की रात को मैंने जो कुछ भी कहा था, वह बैठक के नतीजे के बारे में सच था। अगर शुभेंदु ने अपना रुख बदल लिया है तो अब उन्हें स्पष्ट करना है। मुझे और कुछ नहीं कहना है।’’

रॉय से जब यह पूछा गया कि क्या नाराज नेता से नए सिरे से बातचीत शुरू करने की कोई संभावना है तो उन्होंने इसका नकारात्मक जवाब दिया।

इस बीच, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस रोज नए हथकंडे के साथ सामने आ रही है। अब वह रंगे हाथ पकड़ी गई है। कोई भी सक्षम नेता, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टी में कभी स्थान नहीं पा सकता।’’

गौरतलब है कि नंदीग्राम आंदोलन का चेहरा रहे अधिकारी ने पिछले हफ्ते राज्य के परिवहन, सिंचाई और जलमार्ग मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे अटकलें लगने लगी थीं कि वह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को छोड़ सकते हैं।

अधिकारी को मनाने के लिए कई दौर की बातचीत हुई, माना जाता है कि वह संगठन में बदलाव और अभिषेक बनर्जी एवं प्रशांत किशोर की पार्टी में बढ़ते कद से नाखुश हैं।

कई मौकों पर पार्टी नेतृत्व के प्रति शिकायतों का इजहार कर चुके असंतुष्ट विधायक अधिकारी पूर्वी मेदिनीपुर जिले के शक्तिशाली अधिकारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी और भाई दिव्येंदु अधिकारी क्रमश: तामलुक और कंठी लोकसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं।

अधिकारी का पश्चिमी मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और बीरभूम के कुछ हिस्सों और अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले के अंतर्गत आने वाली 40-45 विधानसभा सीटों पर खासा प्रभाव है।

गौरतलब है कि राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए अगले वर्ष अप्रैल-मई में चुनाव होना है।

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