ताजा खबरें | यह भारत के वैश्विक रिश्तों का बेहतरीन दौर : राष्ट्रपति मुर्मू

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि यह भारत के वैश्विक रिश्तों का बेहतरीन दौर है और ‘‘ हमने दुनिया के विभिन्न देशों के साथ अपने सहयोग और मित्रता को सशक्त किया है।’’

नयी दिल्ली, 31 जनवरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि यह भारत के वैश्विक रिश्तों का बेहतरीन दौर है और ‘‘ हमने दुनिया के विभिन्न देशों के साथ अपने सहयोग और मित्रता को सशक्त किया है।’’

राष्ट्रपति ने यह बात बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए अपने पहले अभिभाषण में कही। उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ हम इस वर्ष एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) की अध्यक्षता कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ हम क्वाड (भारत प्रशांत चतुष्कोणीय वार्ता) का सदस्य होने के नाते, भारत प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए अपनी भूमिका का विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में भूकंप हो या फिर श्रीलंका का संकट, भारत सबसे पहले मानवीय सहायता लेकर पहुंचा।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत को लेकर आज जो सद्भाव है उसका लाभ हमें अफगानिस्तान और यूक्रेन में पैदा हुए संकट के दौरान भी मिला। संकट में फंसे अपने नागरिकों को हम इन देशों से सुरक्षित वापस लेकर आए हैं। ’’ उन्होंने कहा कि इस दौरान भारत ने कई अन्य देशों के नागरिकों की मदद करके अपना मानवीय स्वरूप एक बार फिर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

आतंकवाद के प्रति देश के रुख की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने आतंकवाद को लेकर जो कड़ा रुख अपनाया है उसको भी आज दुनिया समझ रही है। ‘‘इसलिए आतंकवाद के विरुद्ध भारत की आवाज़ को हर मंच पर गंभीरता से सुना जा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष अक्टूबर में भारत में पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आतंकवाद निरोधक समिति की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि इसमें भी भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी भूमिका को स्पष्ट किया।

राष्ट्रपति ने कहा ‘‘साइबर सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को भी मेरी सरकार गंभीरता से पूरे विश्व के सामने रख रही है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार का साफ मानना है कि स्थाई शांति तभी संभव है, जब देश राजनीतिक और रणनीतिक रूप से सशक्त होंगे। ‘‘इसलिए अपनी सैन्य शक्ति के आधुनिकीकरण पर हम निरंतर बल दे रहे हैं।’’

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