देश की खबरें | भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम का तीसरा साल शुरू; जम्मू-कश्मीर में एलओसी के निकट ग्रामीण उत्साहित

राजौरी/जम्मू, पांच मार्च जम्मू कश्मीर में सीमावर्ती गांवों के लोगों का कहना है कि वे अब शांति के माहौल में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं और ऐसा भारत और पाकिस्तान के बीच दो साल पहले संघर्ष विराम संबंधी सभी समझौतों का सख्ती से पालन करने पर बनी सहमति के कारण ही संभव हो सका है।

जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट एक अग्रिम गांव में मोहम्मद यूसुफ कोहली छह लोगों के अपने परिवार के लिए एक नया घर बना रहे हैं।

उनका कहना है कि यह सपना भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के कारण ही पूरा हो रहा है। दोनों पड़ोसी देशों के बीच संघर्ष विराम को पिछले महीने तीसरा वर्ष शुरू हो गया।

सीमा पार से गोलाबारी के भय के बिना सीमावर्ती गांवों के लोग अब शांति के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि वे दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम समझौता जारी रहने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं ताकि उनके बच्चों की स्कूली शिक्षा प्रभावित न हो और विकास गतिविधियों का लाभ सीमा पर अंतिम गांव तक पहुंचे।

भारत और पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर और अन्य क्षेत्रों में संघर्ष विराम संबंधी सभी समझौतों का सख्ती से पालन करने पर 25 फरवरी, 2021 को सहमति जताई थी जिससे अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एलओसी के निकट बसे लोगों को राहत मिली थी।

भारत और पाकिस्तान ने 2003 में एक संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि पाकिस्तान बार-बार इस समझौते का उल्लंघन करता रहा।

कोहली के बड़े बेटे और कॉलेज छात्र इबरार अहमद ने एलओसी के निकट अपने नियाका गांव में निर्माण स्थल पर‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘पिछले चार सालों से मेरा परिवार एक नया घर बनाने के बारे में सोच रहा था लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाए थे क्योंकि हमारे गांव में संघर्ष विराम का उल्लंघन बार-बार होता था।’’

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