जरुरी जानकारी | बड़े बंदरगाहों पर तापीय, कोकिंग कोयला आयात 28 प्रतिशत घटकर 4.6 करोड़ टन रहा

नयी दिल्ली, 20 सितंबर कोरोना वायरस संकट के बीच देश के 12 बंदरगाहों पर तापीय और कोकिंग कोयले का आयात चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-अगस्त के दौरान इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 27.93 प्रतिशत घटकर 4.577 करोड़ टन रहा। बंदरगाहों के संगठन इंडियन पोर्ट्स एसोसिएशन (आईपीए) ने यह कहा।

आलोच्य अवधि में तापीय कोयला आयात 25.42 प्रतिशत घटकर 2.893 करोड़ टन, जबकि कोकिंग कायले का आयात 31.87 प्रतिशत घटकर 1.684 करोड़ टन रहा।

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देश के इन 12 बड़े बंदरगाहों पर लगातार 5वें महीने अगस्त 2020 में कोयले का आयात कम हुआ है।

आईपीए के अनुसार पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-अगस्त अवधि में इन बंदरगाहों ने 3.879 करोड़ टन तापीय कोयला और 2.472 करोड़ टन कोकिंग कोयले का प्रबंधन किया था।

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उल्लेखनीय है कि तापीय कोयला देश के ऊर्जा कार्यक्रम में मुख्य ईंधन स्रोत है। करीब 70 प्रतिशत बिजली उत्पादन इसी ईंधन पर निर्भर है, जबकि कोकिंग कोयले का उपयोग मुख्य रूप से इस्पात बनाने में किया जाता है।

चीन और अमेरिका के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है।

कोविड-19 महामारी के कारण कंटेनर, कोयला और पीओएल (पेट्रोलियम, तेल और ल्यूब्रिकेंट) समेत अन्य जिंसों के रख-रखाव में भी कमी आयी है।

इन बंदरगाहों पर कार्गो रख-रखाव में चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-अगस्त के दौरान 16.56 प्रतिशत घटकर 24.504 करोड़ टन रहा।

देश के ये 12 बंदरगाह दीनदयाल (पूर्व में कांडला), मुंबई, जेएनपीटी, मुड़गांव, न्यू मैंगलोर, कोचीन, चेन्नई, कामराज (पूर्व में एन्नोर), वीओ चिदंबरनार, विशाखापत्तनम, पारादीप और कोलकाता (हल्दिया समेत) हैं।

केंद्र सरकार के नियंत्रण में आने वाले ये बंदरगाह देश के कुल कार्गो यातायात का 61 प्रतिशत रखरखाव करते हैं।

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