देश की खबरें | उत्तराखंड के संवेदनशील शहरों, कस्बों का होगा व्यापक सर्वेंक्षण

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देहरादून, 20 अगस्त उत्तराखंड सरकार आपदा की दृष्टि से संवेदनशील शहरों और कस्बों का व्यापक सर्वेक्षण कराएगी ।

उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक शांतनु सरकार ने कहा कि सर्वेक्षण कराने के लिए निविदाएं आमंत्रित की गयी हैं जिसके बाद इस पर कार्य शुरू किया जाएगा ।

उन्होंने कहा कि अभी निविदाएं मांगी गई हैं और इसे मानसून के बाद इन्हें देखा जाएगा तथा इसमें समय लगेगा।

शांतनु सरकार ने कहा कि इसमें शहरों की भूभौतिकीय और भू-मानचित्रण जांच की जाएगी । उन्होंने कहा, “अभी हमने प्रक्रिया शुरू की है जो योजना के स्तर पर है। हमने अभी यह निर्णय नहीं लिया है कि इसमें कौन से शहर या कस्बे शामिल होंगे।”

इस साल जनवरी में चमोली के जोशीमठ नगर में भूधंसाव होने के कारण कई जगहों पर बहुत से भवनों तथा खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गयी थीं । इस कारण वे रहने के लिए असुरक्षित हो गए थे जिसके बाद वहां से बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा था ।

जोशीमठ के हालात से चिंतित प्रदेश सरकार ने इसके लिए राष्ट्रीय स्तर के अनेक तकनीकी संस्थानों से विभिन्न पहलुओं से जांच करायी थी । इसमें विशेषज्ञों से यह पता लगाने को भी कहा गया था कि क्या इस भूधंसाव और दरारों के लिए 520 मेगावाट तपोवन विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना जिम्मेदार है जिसकी एक भूमिगत सुरंग जोशीमठ के पास से गुजर रही है ।

केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय भू-भौतिक अनुसंधान संस्थान, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान तथा आईआईटी रूड़की जैसे संस्थानों ने नगर का विभिन्न पहलुओं से अध्ययन किया था । हालांकि, इस बारे में संस्थानों के निष्कर्षों का अभी पता नहीं चल सका है ।

उत्तराखंड में इस बार मानसून में भारी बारिश ने काफी कहर बरपाया है जिसमें जगह-जगह भूस्खलन, भूधंसाव, बादल फटने जैसी घटनाओं में 78 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 47 लोग घायल हुए हैं । इनके अलावा, 18 लोग अभी लापता हैं ।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, इन आपदाओं में 1285 मकानों को भी नुकसान पहुंचा ।

देहरादून जिले की विकासनगर तहसील के जाखन गांव में पिछले सप्ताह हुए भूस्खलन और भूधंसाव के कारण 10 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गये जबकि बाकी घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं । इसकी वजह से पूरे गांव के निवासियों को वहां से अन्यत्र स्थानांतरित करना पड़ा ।

जोशीमठ भूधंसाव सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि जोशीमठ सहित प्रदेश के सभी प्रमुख पर्वतीय शहरों की भार वहन क्षमता का अध्ययन कराया जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के आपदा की दृष्टि से संवेदनशील होने के कारण इसके शहरों व कस्बों की भार वहन करने की क्षमता का पता चलना बहुत जरूरी है ।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशासी निदेशक पीयूष रौतेला ने कहा कि एक ही शहर या कस्बे में अलग-अलग जगह की भार वहन क्षमता अलग-अलग हो सकती है और इसका पता एक विस्तृत अध्ययन या जांच से ही लग सकता है ।

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