जरुरी जानकारी | देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है: मांडविया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि देश में फसल पोषक तत्वों (उर्वरकों) की कोई कमी नहीं है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि गैर-यूरिया उत्पादों की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।

ग्रेटर नोएडा (उप्र), 13 सितंबर केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि देश में फसल पोषक तत्वों (उर्वरकों) की कोई कमी नहीं है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि गैर-यूरिया उत्पादों की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि रबी सत्र (अक्टूबर, 2022 से मार्च, 2023) के लिए फॉस्फेटिक और पोटासिक (पीएंडके) उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित नीति (एनबीएस) की घोषणा शीघ्र की जाएगी।

मांडविया ने यहां अंतरराष्ट्रीय डेयरी महासंघ (आईडीएफ) विश्व डेयरी सम्मेलन के मौके पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है।’’

वह अक्टूबर से शुरू होने वाले आगामी रबी सत्र के लिए आपूर्ति की स्थिति के बारे में एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

सरकार द्वारा रबी सत्र में पीएंडके उर्वरकों के लिए एनबीएस नीति की घोषणा करने के समय के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कीमतों का विश्लेषण करने के बाद शीघ्र ही किया जाएगा।

मांडविया ने कहा, ‘‘हम डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और अन्य गैर-यूरिया उर्वरकों की खुदरा कीमतों में किसी भी तरह की वृद्धि नहीं होने देंगे।’’ उन्होंने कहा कि सरकार उच्च वैश्विक कीमतों के बोझ को वहन करेगी।

इससे पहले, मंत्री ने अनुमान लगाया था कि सरकार की उर्वरक सब्सिडी चालू वित्त वर्ष में 2.25-2.5 लाख करोड़ रुपये के बीच होगी, जो पिछले वित्त वर्ष में 1.62 लाख करोड़ रुपये थी।

मांडविया ने यह भी कहा कि किसान तेजी से नैनो लिक्विड यूरिया को अपना रहे हैं, जो पारंपरिक यूरिया की तुलना में मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।

नैनो यूरिया को देश में प्रमुख सहकारी संस्था इफको द्वारा पेश किया गया है।

जुलाई में मांडविया ने कहा था कि भारत को 2025 के अंत तक यूरिया आयात करने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि पारंपरिक यूरिया और नैनो तरल यूरिया का घरेलू उत्पादन देश की वार्षिक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त रूप से होने की उम्मीद है।

मोजूदा समय में देश का यूरिया (पारंपरिक) उत्पादन 260 लाख टन है जबकि स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए लगभग 90 लाख टन का आयात किया जाता है।

यूरिया की एमआरपी 267 रुपये प्रति बोरी (प्रति बोरी 45 किलो की) तय की गई है।

पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी एक अप्रैल, 2010 से एनबीएस योजना द्वारा नियंत्रित की जा रही है।

इस योजना के तहत सरकार द्वारा पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन (एन), फॉस्फेट (पी), पोटाश (के) और सल्फर (एस) के लिए सब्सिडी की एक निश्चित दर (प्रति किलो के आधार पर) की घोषणा की जाती है।

राजेश

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